मऊ, जेएनएन। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव सकुशल संपन्न हो गया है। जनपद की 671 ग्राम पंचायतों को नए प्रधान भी मिल गए हैं परंतु 157 ग्राम पंचायतों का गठन अभी नहीं हो पाएगा। इसके चलते इन ग्राम पंचायतों के प्रधानों को अभी कुछ समय के लिए इंतजार करना पड़ेगा, प्रशासक ही इन ग्राम पंचायतों का संचालन करेंगे। यह संकट ग्राम पंचायत के चुनाव में केवल मलाइदार प्रधान पद को तवज्जो देने एवं सदस्यों के चुनाव के हुए मोहभंग के चलते ऐसे हालात उपजे हैं।

जनपद में ग्राम पंचायत समितियों को निष्क्रिय कर दिए जाने के चलते ग्राम पंचायत सदस्यों के चुनाव से लोगों का मोहभंग हो गया है। ग्राम पंचायत में केवल प्रधान को ही तवज्जो दिए जाने के चलते ऐसे हालात पैदा हुए हैं। पांच वर्ष पर होने वाले हर चुनावों में यही हालात बन जाते हैं, इसके बावजूद इसके कोई सबक नहीं लिया जाता। कारण है इसका कि एक बार जैसे ही ग्राम पंचायत का गठन हो गया तो सारा श्रेय केवल प्रधान ही लूटते हैं। ग्राम पंचायतों के संचालन में सदस्यों के हाथ भी कुछ नहीं लगता। अगर सदस्य प्रशासनिक स्तर पर शिकायत भी करते हैं तो प्रशासन प्रधानों का ही पक्ष लेता है। इसके चलते बीते चुनाव में केवल प्रधान पद ही फोकस रहा। इसका नतीजा रहा कि जनपद की 157 ग्राम पंचायतों में दो तिहाई सदस्य तक निर्वाचित नहीं हुए। इसका खामियाजा यह रहा कि प्रधान तो जीत गए परंतु ग्राम पंचायत संगठित नहीं हो पाई। ग्राम पंचायत की समितियों का गठन नहीं होने के चलते इन ग्राम पंचायतों में अभी प्रशासक ही काम देखेंगे।

ग्राम पंचायत में गठित होने वाली समितियां

1- नियोजन एवं विकास समिति

2- प्रशासनिक समिति

3- निर्माण समिति

4- जल प्रबंधन समिति

5- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति

6- शिक्षा समिति

असंगठित ग्राम पंचायतों की ब्लाकवार संख्या

ब्लाक - कुल ग्राम पंचायत - असंगठित ग्राम पंचायत

1- बडरांव - 72 - 19

2- दोहरीघाट - 74 - 20

3- फतहपुर मंडाव - 78 - 17

4- घोसी - 72 - 22

5- कोपागंज - 77 - 25

6- मुहम्मदाबाद गोहना - 83 - 22

7- परदहा - 51 - 11

8- रानीपुर - 87 - 10

9- रतनपुरा - 77 - 11