जागरण टीम, उन्नाव : हरिद्वार और नरौरा बांध से पानी छोड़ने में कमी होने से गंगा का जलस्तर लगातार घट रहा है। सोमवार को यह खतरे के निशान से 5 सेमी नीचे पहुंच गया। इससे अब बाढ़ के चलते अपने घरों को छोड़कर पलायन कर चुके लोगों ने अपने घरों को वापस लौटने की तैयारी शुरू कर दी है। ज्यादातर लोग नावों का इंतजाम करने में लगे हैं। हालांकि अभी भी मोहल्लों में पानी भरा हुआ है। लेकिन पानी के खतरे के निशान से नीचे उतर जाने से लोगों में राहत है।

बीते दिनों खतरे के निशान से 19 सेमी ऊपर बह रही गंगा के जलस्तर में अब लगातार कमी आ रही है। पहाड़ों पर बारिश थमने और नरौरा और हरिद्वार से छोड़े जाने वाले पानी में कमी आने से यहां भी पानी ने उतरना शुरू कर दिया है। इससे अभी तक गंगा के अधिकतम जलस्तर में 24 सेमी की कमी आई है। बीते दिनों खतरे के निशान से 113.000 मीटर से 19 सेमी चढ़कर 113.190 तक पानी पहुंच गया था। लेकिन बीते पांच दिनों से इसमें लगातार कमी आ रही है और यह सोमवार को भी घटा। जलस्तर में लगातार कमी जाने से अब लोगों में गंगा के शांत होने से अब बाढ़ पीड़ितों को घरों को लौटने की उम्मीद बढ़ गई है। शुक्लागंज में भी पानी घटने से लोगों की उनके घर लौटने की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन क्षेत्र के सैकड़ों मकान अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हैं। लोगों के पास नावों से आवागमन के सिवाय और कोई उपाय नहीं है। इससे सैकड़ों परिवार अभी भी आजादमार्ग पर तिरपाल डालकर रह रहे हैं। राजीव नगर खंती, गोताखोर व जाजमऊ क्षेत्र के बाढ़ पीड़ित सरकारी राहत सामग्री से वंचित रह गए। वहीं समाज सेवियों ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत सामग्री का वितरण कराया। परियर में ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त के चेयरमैन ने क्षेत्रीय शाखा प्रबंधकों के साथ बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामग्री वितरित की। क्षेत्र के कोलवा, देवीपुरवा, टपरा, बाबू बंगला, माना बंगला, ललतूपुरवा व पनपथा आदि गांव के लोगों को बैंक के चेयरमैन एसबी ¨सह ने राहत सामग्री व मेडिकिट भी दी। इस मौके पर क्षेत्रीय प्रबंधक पीपी श्रीवास्तव, वरिष्ठ प्रबंधक आर के अस्थाना, क्षेत्रीय वरिष्ठ प्रबंधक अशोक बाजपेयी, शाखा प्रबंधक मिर्जापुर सोमेंद्र ¨सह, शाखा प्रबंधक परियर अरमान ¨सह, सहायक प्रबंधक शशांक पांडेय, अभिनव ¨सह, देवेंद्र ¨सह, अवधेश कुमार आदि मौजूद रहे। सफीपुर में बाढ़ प्रभावित गांव के लोग अब घर वापसी करने लगे हैं। नाव के अभाव में वह पानी से होकर जा रहे हैँ। इसमें प्रशासन की ओर से की गई नावों की व्यवस्था पूरी नहीं पड़ रही है जिससे लोग बाढ़ के पानी से होकर जाने को मजबूर है।

Posted By: Jagran