जागरण संवाददाता, उन्नाव : नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होते ही यातायात व परिवहन विभाग द्वारा सख्ती बढ़ाई गई तो वाहन चालकों में दहशत भरी। जिसके वाहन के पेपर अधूरे थे वह उन्हें पूरा कराने में जुट गया है। सबसे अधिक प्रदूषण प्रमाण पत्र को लेकर सख्ती हुई तो इसे बनाने वालों की दुकानों में लाइन लगने लगी। यह देख दुकानदारों ने रेट बढ़ा दिए स्थिति यह हुई कि इस समय वाहन चालकों को एक प्रदूषण प्रमाणपत्र के तय रेट से दोगुना दाम देने पड़ रहे हैं।

जुर्माना बढ़ने से लोग और सकते में आए तो सभी को नियमों की याद आई। कभी पूरे दिन वाहनों का इंतजार करने वाले प्रदूषण चेक करने के प्वाइंट्स पर इन दिनों भीड़ लग रही है जिससे प्रमाण पत्र के दाम भी बढ़ गए। विभागीय तय दामों से अधिक वसूली कर वह लोग वाहन मालिकों की जेब ढीली कर रहे हैं। जानकार बताते हैं कि प्रदूषण प्रमाण पत्र का पेट्रोल वाहन का 30 और डीजल वाहन का 40 रुपये शुल्क निर्धारित है। लेकिन इसके लिये वाहन चालकों से 60 से 100 रुपये वसूले जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को नहीं है लेकिन वह इस पर कार्रवाई को आगे नहीं आ रहे।

जानकार बताते हैं कि जब सख्ती नहीं थी तो एक प्रमाणपत्र बनाने वाली दुकान पर रोज सिर्फ 20 से 25 लोग ही जाते थे, लेकिन इन दिनों हालात यह हैं कि यह संख्या बढ़कर तीन सौ से भी अधिक हो गई है। नए नियम में अधिक जुर्माना से बचने को लोग जागरूक हुए तो इनकी संख्या बढ़ी।

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नया नियम लागू होने के बाद से प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाने वालों की संख्या जरूर बढ़ी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तय रेट से अधिक वसूली की जाए। इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी अधिक दाम ले रहा होगा उसके खिलाफ कार्रवाई करवाउंगा।

-अनिल कुमार त्रिपाठी, एआरटीओ-प्रशासन

Posted By: Jagran

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