जागरण संवाददाता, उन्नाव: नामांकन करवाने के बाद स्वयं की प्रत्याशिता घोषित होने का इंतजार कर रहे दावेदारों के मंसूबों पर कहीं बीएलओ तो कहीं निर्वाचन कार्यालय की गलती का पहाड़ टूट पड़ा। जो प्रधान बनने के सपने संजोए थे, उन्हें अपमार्जित सूची में मतदाता सूची से ही नाम कटने का झटका सहना पड़ा। जिम्मेदारों की गलती से आक्रोशित संबंधित दावेदार व मतदाताओं ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए किसी भी सूरत में नाम वापस मतदाता सूची में जोड़ने की गुहार प्रशासन, शासन व कोर्ट तक लगा रहे हैं। नाराज मतदाताओं व उम्मीदवारों ने इस बाबत जिलाधिकारी आवास से लेकर तहसील तक कई जगहों पर धरना देकर नाराजगी प्रकट की है।

सिकंदरपुर सरोसी के हफीजाबाद बनकटा निवासी विजय श्रीवास्तव ने अपना और अपनी भाभी रेखा श्रीवास्तव का प्रधान पद के लिए नामांकन कराया था। शुक्रवार को नामांकन पत्रों की जांच भी पूरी हो गई थी लेकिन एक घंटे बाद विजय के पास फोन पहुंचा। फोन करने वाले ने बताया कि मतदाता सूची में उनका और उनकी भाभी का नाम गायब है। इसलिए उनका नामांकन निरस्त किया जाता है। तुरंत विजय ब्लाक पहुंचे तो उन्हें तहसील भेज दिया गया। वहां से उन्हें लखनऊ निर्वाचन कार्यालय भेजा गया। वहां भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो विजय वापस लौट गए। शनिवार को विजय, भाभी रेखा व अन्य ग्रामीणों के साथ डीएम आवास पर पहुंच गए। इसके बाद जैसे ही सभी आवास के अंदर जाने लगे तभी गेट मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने गेट बंद करना शुरू कर दिया। इससे ग्रामीण आक्रोशित हो गए और डीएम आवास का घेराव कर दिया। सूचना पर कोतवाली पुलिस और एसडीएम सदर सत्यप्रिय सिंह पहुंचे। वह सभी को अपने साथ तहसील ले गए। विजय ने बताया कि तहसील में एसडीएम ने उनकी किसी प्रकार की सहायता करने से खुद को असहाय बताया और हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। वह हाईकोर्ट गए लेकिन वहां पर सोमवार को बुलाया गया। विजय का कहना है कि वह हाईकोर्ट में इससे संबंधित रिट दायर कर गांव में चुनाव रुकवाने की मांग करेंगे।

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आक्रोशित ग्रामीणों ने धरना देने का किया प्रयास

सफीपुर: तहसील में संविदा में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर राहुल पर मतदाता सूचियों में तहसील के आसपास रहने वाले कुछ सुसंगठित दलालों की साठगांठ से नाम काटने एवं जोड़ने की शिकायत उच्चाधिकारियों से मतदाता सूची के प्रकाशन के दौरान लोगो ने की थी। जिसे अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया, शिकायतकर्ताओं को यह कहकर आश्वस्त करते रहे कि अंतिम प्रकाशन में सूची में नाम शामिल कर लिए जाएंगे। जब अंतिम सूची का प्रकाशन हुआ तो लोगो के पैरों के तले जमीन ही खिसक गई। ददलहा, मतलबपुर, बम्हना जमालनगर, बहाउद्दीन पुर टिकाना, सेता, ककरौरा आदि गांवों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम नदारद मिले। जबकि, बड़ी संख्या में फर्जी नाम शामिल कर दिए गए काटे गए। जिससे कई लोग चुनाव लड़ने से वंचित हो गए। जब शिकायत पहुंचाई तो एक बार फिर जांच कराकर नाम शामिल किए जाने का आश्वासन दिया जा रहा है। जबकि, प्राथमिक जांच में यह खुलासा हो चुका है बिना बीएलओ के हस्ताक्षर से नाम काटे एवं जोड़े गए। कई बीएलओ ने लिखित में बताया भी अब सब कुछ स्पष्ट हो जाने के बाद भी तहसील प्रशासन दोषी कर्मचारी एवं उसके संगठित गिरोह के खिलाफ कोई कार्यवाही न कर उसे बचाने का प्रयास कर रहा है। जब कई दिनों बाद भी कोई ठोस कार्यवाही न हुई तो आक्रोशित ग्रामीणों ने तहसील के सामने प्रदर्शन करने का प्रयास किया। जिसे किसी तरह समाप्त कराया गया।

प्रधान व बीडीसी के भी पर्चे हुए खारिज

उन्नाव: बीघापुर में ग्रामसभा बरदहा की प्रधान पद की उम्मीदवार सरला बाजपेयी का 15 अप्रैल को निधन हो गया था। इसी कारण उनका पर्चा भी खारिज हो गया। पुरवा में एक प्रधान व तीन बीडीसी के पर्चे खारिज हुए। नवाबगंज में प्रधान पद के दो पर्चे निरस्त कर दिए गए। मियागंज में क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) के चार पर्चे खारिज किए गए। असोहा में मेदपुर के प्रधान पद प्रत्याशी रवींद्र कुमार और बीडीसी वार्ड नंबर 43 से दावेदार पंकज गुप्ता का नामांकन निरस्त किया गया।

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