उन्नाव, जेएनएन। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने बड़े-बड़ों की भले ही बोलती बंद हो जाती है, लेकिन उन्नाव की नूपुर के हौसले उनके सामने भी बुलंद ही रहे। उसके कदम भले ही डगमगाते हों पर हौसलों के सहारे दिव्यांग बिटिया 'नूपुर' सफलता की सीढिय़ां पूरे आत्मविश्वास के साथ चढ़ रही है।

कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी 2019) में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सवालों का जवाब देने में भी उन्नाव की बिटिया हिचकी नहीं बल्कि पूरे धैर्य के साथ वह एक के बाद एक पांच सवालों का जवाब देकर आगे बढ़ती रही। हॉट सीट पर बैठने से पहले उसने कहा जीवन के अंधकार से लडऩे में जब सहारा नहीं लिया तो ज्ञान की परीक्षा में भी किसी का सहारा नहीं लूंगी। शुक्रवार को को भी वह बिग बी के सवालों के जवाब देते दिखेगी।

जन्म से मुश्किलों का सामना कर जीवन के हर मोड़ पर हिम्मत से संघर्ष करने का बुलंद हौसला रखने वाली उन्नाव के भगवंतनगर क्षेत्र के गांव कपूरपुर की बिटिया नूपुर चौहान को केबीसी की हॉट सीट पर बैठकर बिग बी के सवालों का जवाब देते देखने के लिए परिवारीजन ही नहीं बल्कि गांव क्षेत्र से लेकर पूरे जिले के लोग रात के 9 बजने का इंतजार कर रहे थे। दूसरे एपीसोड में ही नूपुर हॉट सीट पर पहुंच गईं। बिटिया की प्रतिभा को देखने के लिए कपूरपुर गांव में लोग सार्वजनिक स्थानों पर टीवी पर शो देखते रहे।

देश के डॉक्टरों को उसने संदेश दिया आप अपनी जिम्मेदारी शिद्दत से निभाएं क्योंकि आपकी एक गलती किसी की जान ले सकती है। डॉक्टर की ही गलती का परिणाम है मै इन हालातों से गुजर रहीं हूं। सवालों का जवाब देने से पहले उसने बताया कि अपने अंदर की झांसी की रानी को जगा जीवन के अंधकार से लडऩे का जो संकल्प लिया था, वह आज सच कर पाई हूं।

नूपुर ने शायराना अंदाज में कहा कि जिंदगी में मुश्किलें हैं फिर भी जिंदगी खूबसूरत है। दिव्यांग होने के बाद भी सिफ सोच बदलकर जिंदगी के घने अंधेरे में मैंने उजाला किया है। इससे पहले शूटिंग में मां कल्पना सिंह, पिता राजकुमार सिंह चौहान उर्फ मुन्ना सिंह और भाई शशांक भी में दिखे। गांव में मौजूद पिता मुन्ना सिंह और चाची को गांव के तीरथ सिंह, संतोष सिंह, मनवीर, अरुण, अशोक, अवधेश आदि ने बधाई दी। 

पैदा होते ही डॉक्टर ने डस्टबिन में फेंक दिया था

नूपर एक शिक्षक हैं और छोटे बच्चों को पढ़ाती हैं। नूपुर से अमिताभ बच्चन जी ने पूछा कि उनकी ये हालत कैसे हुई इसके जवाब में नूपुर चौहान ने जो कहनी बताई है वो हैरान करने वाली है। नूपुर ने बताया कि जब वो पैदा हुईं तो उन्हें सर्जिकल औजार लग गए थे ऑपरेशन के वक्त और वो रोईं नहीं, डॉक्टरों ने कहा मृत है और उन्हें डस्टबिन में फेंक दिया। इसके बाद नूपुर की आंटी ने कहा कम से कम हमें वो बच्ची को साफ करके दे तो दो। जब डस्टबिन से बच्ची को निकाला गया तो उन्होंने कहा कि बच्ची को थोड़ा थपथपाओ शायद इसकी सांसे चल जाए और वही हुआ नूपुर रोने लगी लेकिन वो रोईं तो 12 घंटे तक रोती ही रहीं। नूपुर ने कहा वो मरी नहीं थीं बस उनके शरीर में ऑक्सीजन की कमी थी। बाद में डॉक्टर्स ने बताया कि ये स्पेशल चाइल्ड है। नूपुर ने कहा उनका शरीर जरूर दिव्यांग है लेकिन उनका दिमाग सामान्य है। नूपुर ने अपने स्कूल में टॉप भी किया था।

Posted By: Dharmendra Pandey

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