जागरण संवाददाता, उन्नाव: लगातार मानक विहीन काम और जांच में कलई खुलने के बाद भी कार्यदाई संस्था यूपीपीसीएल को एक बार फिर जांच के नाम पर बचाने की कोशिश हो रही है। प्रशासन ने दो जांचों के बाद तीसरी जांच के लिए दिए निर्देशों का महज कागजी कोरम पूरा हो रहा है। अब तक पुरवा बालिका छात्रावास में तीसरी जांच टीम का एक भी सदस्य संस्था के घटिया काम की जांच करने मौके पर नहीं गया है। जबकि जांच के लिए नौ सितंबर को तीसरी टीम गठित की गई थी।

यूपीपीसीएल पर प्रशासन पर मेहरबान है। इस बात का प्रमाण स्वयं प्रशासन की कार्यशैली दे रही है। अब तक संस्था के महज दो कामों की संज्ञान में लिया जाए तो यहां किया गया खेल यह समझने के लिए काफी है कि यूपीपीसीएल पर जान बूझकर रहमदिली दिखाई जा रही है। यूपीपीसीएल को जिले में करीब 90 करोड़ के काम मिल चुके हैं। कामों को लेकर प्रशासन जहां यह कहकर खुद को पाक साफ बताता है कि संस्था सीधे शासन से काम ला रही है जबकि इस साफगोई के बीच प्रशासन के आलाधिकारी यह भूल जाते हैं कि काम तो उनके जिले में हो रहे हैं।

और जब यह काम मानक विहीन साबित होंगे तो प्रशासन के मुखिया होने के नाते प्रश्नचिह्न लगाकर सख्त कार्रवाई तो की ही जा सकती है। प्रशासन यह भी नहीं करना चाहता है। वरना यूपीपीसीएल के दो कामों पर ही गौर किया जाए तो जांच टीम अधोमानक काम की रिपोर्ट जांच टीम दे चुकीं हैं। अदौरा जांच में दोषी पाए जाने के बाद कार्यदाई संस्था के अधिकारी को बचाते हुए ठेकेदार को ही मुकदमे में फंसा दिया जाता है। पुरवा बालिका छात्रावास में बनवाए गए घटिया सेप्टिक टैंक की तीन दीवार ढहने के बाद संस्था के मानक विहीन काम को लेकर मचा हो-हल्ला जांच के नाम पर शांत करने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व में डीएम और सीडीओ स्तर से की गई जांच में जहां अलग-अलग रिपोर्ट तैयार की गई। बाद में दोनों की जांच मिलाकर क्रॉस करा दिया गया। अब डीएम ने तीसरी टीम का गठन नौ सितंबर को यह कहते हुए किया था कि तीसरी टीम दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। डीएम के स्तर से दोबारा गठित की गई टीम आदेश के पांच दिन बाद भी मौके पर नहीं गई है। जबकि इस बीच मानक विहीन बनवाए गए सीवरेज टैंक की दीवारें गिरने के बाद उसमें बरसात का पानी जरूर भर चुका है।

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हम लोग अभी तक पुरवा बालिका छात्रावास की जांच के लिए नहीं गए हैं। इधर दो दिन तो मैं कोर्ट गया हुआ था। अब शुक्रवार को आया हूं। प्रांतीय खंड के अधिशाषी अभियंता से बात करके मौके पर जांच के लिए जाऊंगा। संभवत: सोमवार तक जाना हो पाएगा।

राकेश कुमार, डीआइओएस

Posted By: Jagran

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