जागरण संवाददाता, उन्नाव : सीएमओ कार्यालय द्वारा स्वास्थ्य विभाग में करीब एक करोड़ से सामग्री क्रय में नियमों को ताक पर रख खरीद में गड़बड़ घोटाला करने के मामले में सीएमओ पर शासन का शिकंजा कस गया। नियम विरुद्ध खरीद कर गड़बड़ी करने की शिकायत पर जिला स्तर पर हुई जांच में सीएमओ को खरीद में गड़बड़ी करने का दोषी करार दिया गया था। डीएम द्वारा शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट को शासन ने गंभीरता से लिया है। शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य सचिव ने सीएमओ को आरोप पत्र देकर जवाब तलब किया है।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में फरवरी और मार्च 2019 में स्वास्थ्य विभाग द्वारा साज-सज्जा, फर्नीचर आदि सामग्री क्रय की गई थी। अलग-अलग बजट से मिले धन में लगभग 1.10 करोड़ की खरीद की गई थी। मई में कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने डीएम से खरीद में गड़बड़ घोटाला होने की शिकायत की। जिस पर डीएम ने नगर मजिस्ट्रेट और वित्त एवं लेखाधिकारी और समाज कल्याण अधिकारी की तीन सदस्यीय कमेटी को जांच करने का आदेश दिया था। जांच समिति ने खरीददारी में नियमों का पालन न करने की पुष्टि की थी। समिति अध्यक्ष ने जांच रिपोर्ट भी दे दी। जांच रिपोर्ट दो माह से दबी रही। जागरण ने मामले को लगातार उठाया। 28 मई को जागरण ने एक करोड़ की खरीद में मिली गड़बड़ी, जांच फाइलों में दफन शीर्षक से प्रमुख से खबर छापी जिसके बाद प्रशासन जागा और सीडीओ की अध्यक्षता में पुन: जांच समिति गठित कर जांच कराई। सीडीओ ने जुलाई माह में जांच पूरी कर खरीद में वित्तीय नियमों का पालन न करने और गड़बड़ी किए जाने की पुष्टि कर डीएम को रिपोर्ट सौप दी। डीएम ने रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया। खरीद फरोख्त में गड़बड़ घोटाले के मामले को गंभीरता से लेते राज्यपाल के निर्देश पर सचिव वीहेकाली झिमोमी ने सीएमओ को आरोप पत्र भेज कर उनका जवाब मांगा है। सीएमओ डॉ. लालता प्रसाद ने कहा अभी उनको कोई आरोप पत्र नहीं मिला है।

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इन आरोपों पर मांगा गया है जवाब

- वित्तीय वर्ष 2018-19 में अनुदान संख्या 32 के अन्तर्गत फर्नीचर, उपकरण, साज-सज्जा अन्य मद में क्रय संबंधी फर्म द्वारा प्रस्तुत बिलों पर क्रय की गई सामग्री को स्टाक बुक के पृष्ठ पर एसएमओ के हस्ताक्षर मिले हैं। स्टाक को अभिरक्षा में रखने वाले कर्मचारी के हस्ताक्षर नहीं हैं।

- 15 दिनों के अंतराल में जेम पोर्टल पर बिना बीडिग के 30 लाख से अधिक की सामग्री क्रय की गई। जबकि जेम पोर्टल के माध्यम से क्रय करने में विक्रेता द्वारा जारी की गई सीआरएसी संबंधी कोई अभिलेख नहीं मिला है। इससे गुणवत्ता का परीक्षण किए बिना ही भुगतान कर नियम का पालन नहीं किया गया। यह अनिमितता और लापरवाही का द्योतक है।

- बजट की मांग और प्राप्त आवंटन के अनुरूप धनराशि का उपयोग न कर वित्तीय वर्ष के अंत में बड़ी धनराशि खर्च नहीं की गई जिसके लिए दोषी करार दिया गया है।

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पंद्रह दिन में सीएमओ से मांगा जवाब

- राज्यपाल के निर्देश पर सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग वी हेकाली झिमोमी ने 9 अगस्त को सीएमओ को आरोप पत्र भेज निर्देश दिया है कि वह पंद्रह दिन में आरोपों के संबंध में अपना पक्ष रखें।

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वित्त नियंत्रक करेंगे जांच

- सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग वी हेकाली झिमोमी ने निर्देश पर अनुसचिव जेएल यादव ने पत्र जारी किया है जिसमें सीएमओ उन्नाव के खिलाफ वित्तीय अनियमितता के आरोप में कार्रवाई करने के लिए विभागीय जांच वित्त नियंत्रक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को सौपी है। साथ ही एक माह में जांच आख्या देने को कहा है।

Posted By: Jagran

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