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उत्तर प्रदेश में गन्ने की चार नई उन्नत किस्म को मंजूरी, कोयंबटूर 0238 का विकल्प तैयार

Published: Wed, 07 Oct 2026 07:19 PM (IST)

उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने की चार नई उन्नत किस्मों को मंजूरी दी है, जो अधिक उपज और बेहतर चीनी परता के साथ लाल सड़न रोग प्रतिरोधी हैं।

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HighLights

  1. उत्तर प्रदेश में गन्ने की चार नई उन्नत किस्में मंजूर।

  2. ये किस्में को.0238 से बेहतर उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता रखती हैं।

  3. को.शा. 23232 और को.शा.18232 ने उच्च उपज क्षमता दिखाई।

प्रदीप शर्मा, सुलतानपुर। वर्षों से किसानों की पसंद बनी को.0238 का अस्तित्व 2021 में समाप्त हो गया था, इसके बाद ऐसी कोई किस्म नहीं बनी जो 0238 को टक्कर दे सके। अब विकल्प अब तैयार हो गया है। गन्ने की खेती में अधिक उपज, बेहतर चीनी परता और रोगरोधिता के मानकों पर खरी उतरने वाली चार नई किस्मों को उत्तर प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी।

इनमें दो अगेती और दो मध्य-देर से पकने वाली किस्में हैं। खास बात यह है कि अगेती किस्म को.शा. 23232 ने उपज और चीनी परता दोनों में को. 0238 से बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं मध्य-देर से पकने वाली को.शा.18232 की औसत उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर तक मिली है। गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के विज्ञानी के साथ प्रगतिशील किसानों और चीनी मिल प्रतिनिधियों ने नई किस्मों को मंजूरी दी है।

को.0238 से 9.44 प्रतिशत ज्यादा उपज

शाहजहांपुर गन्ना शोध परिषद की अगेती किस्म को.शा.23232 की पौधा गन्ना औसत उपज 85.56 टन प्रति हेक्टेयर मिली। यह को.0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक है। इसकी पेड़ी उपज भी 80.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो को.0238 से 3.16 प्रतिशत ज्यादा है। नवंबर, जनवरी और मार्च में इसकी शर्करा मात्रा भी मानक किस्म से अधिक मिली। साथ ही यह लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी और अच्छी पेड़ी क्षमता वाली है। इन्हीं विशेषताओं के कारण इसे को.0238 के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

86.57 टन उपज वाली दूसरी अगेती किस्म

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की विकसित को.लखनऊ 21201 की औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर मिली है। इसमें पोल इन केन 13.94 प्रतिशत रहा, जबकि को.0238 में यह 13.71 प्रतिशत है। लाल सड़न रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधक क्षमता और अच्छी पेड़ी के कारण इसे पूरे प्रदेश में खेती के लिए अवमुक्त किया गया है।
92.38 टन उपज से बढ़ी उम्मीद

मध्य-देर से पकने वाली को.शा.19235 की औसत उपज 87.58 टन प्रति हेक्टेयर मिली, जो को.शा.767 से 21.01 प्रतिशत अधिक है। इसकी पेड़ी उपज भी 73.90 टन प्रति हेक्टेयर रही। दूसरी किस्म को.शा.18232 ने सबसे अधिक 92.38 टन प्रति हेक्टेयर औसत उपज दी। यह को.शा.767 से 26.51 प्रतिशत अधिक है। इसकी पेड़ी उपज 82.06 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो मानक किस्म से 23.70 प्रतिशत अधिक है।

आठ नई नोटिफाइड किस्मों को भी जगह

केंद्र सरकार से नोटिफाइड आठ किस्मों को भी प्रदेश में खेती के लिए अंगीकृत किया गया है। इनमें को.पी.16437, को.पी.11438 और को.लख.16466 अगेती हैं। को.16030, को.17018, को.18022, को.पीबी.17215 और को.पीबी.18213 मध्य एवं देर से पकने वाली किस्में हैं। को.पी.16437 और को.पी.11438 पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए, जबकि अन्य किस्में पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के लिए अंगीकृत की गई हैं।

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