जागरण संवाददाता, सुलतानपुर : जिला व महिला अस्पताल के साथ-साथ सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी आने वाले मरीजों को दवाइयां नहीं मिल रहीं। तेज बुखार से तप रहे अपने बच्चे को दिखाने राम रती देवी कादीपुर से जिला चिकित्सालय आई थीं। डाक्टर ने बाहर से दवाइयां लिख दीं। बताया गया कि अस्पतालों में दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। इसी तरह किसी स्वास्थ्य केंद्र पर एंटीबोयोटिक मौजूद है तो कहीं एंटी एलर्जिक नहीं है। कहीं एनलजेसिक दवाइयों का टोटा है तो कहीं एंटीरैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है।'जागरण'की पड़ताल म ं जो हक कत सामने आई वह निश्चित रुप से चिंताजनक है। जय¨सहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी बायोटिक टैबलेट, मेट्रोजिल टैबलेट, उल्टी की दवा, एंटी फंगल ट्यूब, बच्चों के लिए पैरासिटामोल, एआरबीइंजेक्शन अस्पताल म ं उपलब्ध नहीं है। चीफ फार्मासिस्ट आइपी उपाध्याय व करूणा द्विवेदी के मुताबिक भदैंया सीएचसी में एंटीबायोटिक कई दिनों से समाप्त है। पैरासिटामाल की कमी है। एंटी एलर्जिक दवाएं नहीं ह । पेनकिलर आदि मौजूद हैं। एंटी रैबीज इंजेक्शन है, जो पीड़ितों को लगाए जा रहे हैं।

कादीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के फार्मासिस्ट बृजेश बहादुर की मानें तो केंद्र पर जीवन रक्षक दवाओं के अतिरिक्त शुगर व ब्लड प्रेशर तथा एआरवी (एंटी रेबीज वैक्सीन) की दवाएं पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। पर, अन्य ब्लाकों के मरीजों के आ जाने व सीएचसी के एफआरयू होने के चलते यहां एआरवी वैक्सीन कम पड़ जाती हैं। मोतिगरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पैरासीटामाल, मैट्रोजिल, डाइक्रोपैरा, पेट संबंधित, ओआरएस, ग्लूकोज, दर्द के इंजेक्शन समेत सभी दवाएं उपलब्ध होने की बात बताई गई। फार्मासिस्ट केपी पांडेय ने बताया कि यहां दवाओं की कमी नहीं है। सुबह से जो मरीज आ रहे हैं उन्हें दवाइयां दी जा रही हैं।

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जिला मुख्यालय पर दवाओं का पर्याप्त भंडार है । जहां जरूरत होती है वहां भेजी जाती है। जहां दवाइयां नहीं हैं वहां लोकल परचेज करा लिया जाता है। अस्सी दवाओं का रेट कांट्रेक्ट है।

-डा. सीबीएन त्रिपाठी

-मुख्य चिकित्साधिकारी सुलतानपुर

Posted By: Jagran