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Google Map पर कई गांवों का नाम गलत, 'गौरा' बना गावर तो 'भपटा' बना भाप्ता; लोग भटक रहे रास्ता

Published: Sat, 03 Oct 2026 12:34 PM (IST)

गूगल मैप्स पर सुल्तानपुर के भदैंया ब्लॉक के कई गांवों के नाम गलत दर्ज होने से ग्रामीणों और बाहर से आने वालों को काफी परेशानी हो रही है।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

HighLights

  1. सुल्तानपुर के भदैंया ब्लॉक में गूगल मैप्स पर गांवों के नाम गलत।

  2. 40 से अधिक गांवों के नाम गलत होने से ग्रामीणों को परेशानी।

  3. खंड विकास अधिकारी ने शिकायत पर नाम सुधारने का आश्वासन दिया।

संवाद सूत्र, सुलतानपुर। डिजिटल युग में जहां लोग अपने गांव, शहर और स्थान को खोजने के लिए सबसे ज्यादा मोबाइल पर गूगल मैप का सहारा लेते हैं। वहीं भदैंया ब्लॉक में अधिकांश गांवों के नाम गूगल पर गलत दर्ज होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। बाहर से आने वाले लोग गूगल पर दर्ज गलत नामों के चलते भटकते रहते है। गूगल में गौरा बना गावर तो भपटा को भाप्ता दर्शा रहा है।

विकास खंड क्षेत्र के कई गांवों के नाम गूगल पर बदले हुए या गलत दिखाई दे रहे हैं। इससे लोगों को अपने ही गांव को सर्च करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख व सपा नेता धर्मेन्द्र सिंह बबलू के भपटा गांव का नाम गूगल मैप पर भाप्ता दिख रहा है।

विधान परिषद सदस्य शैलेन्द्र सिंह का गांव उतुरी को गूगल उअतुरी बना रहा है। इसी तरह गौरा गांव का नाम गावर दर्ज किया गया है। सराय अचल का नाम सरयाचल तो गुपसांड गांव का नाम गूगल मैप पर गुप्सर बताया जा रहा है।

पाल्हनपुर का नाम पल्हपुर तो जुड़ारा का नाम जुदारा दिख रहा है। ब्लॉक के 71 मे से 40 गांवों का नाम गूगल गलत बता रहा है। गांवों के इन बदले हुए नामों के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले लोगों को गूगल के सहारे गांव ढूंढ़ने में काफी परेशानी हो रही है।

गांव खोजने में भटकते हैं लोग

पन्ना टिकरी निवासी समाजसेवी अनुपम पाठक का कहना है कि आज के समय में अधिकांश लोग गांवों का नाम गूगल पर खोजते हैं। जब गांव का सही नाम ही गूगल पर दर्ज नहीं होगा तो वहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

राजकीय माडल इंटर कॉलेज के अध्यक्ष अरविंद पांडेय का कहना है कि कई बार ऑनलाइन फार्म भरते समय या लोकेशन भेजते समय भी समस्या आती है, क्योंकि गूगल पर सही नाम नहीं मिलता।

खंड विकास अधिकारी भदैंया नीलिमा गुप्ता ने कहा कि ब्लॉक स्तर पर कोई इस स्तर की व्यवस्था नही है। फिर भी शिकायत मिलने पर पत्राचार कर गांवों के नामों को सही करवाया जाएगा।निर्माण के दो वर्ष बाद भी हस्तांतरित नहीं हो सका विद्यालय।


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