सुलतानपुर : कोविड-19 से अनाथ हुए बच्चों की पहचान में अभी प्रशासन जुटा है। फिलहाल मार्च 2020 के बाद ऐसा कोई प्रकरण सामने नहीं आया है, जिसमें माता-पिता दोनों की मौत हो गई हो और बच्चे अनाथ हो गए हों। प्रशासनिक दावे के मुताबिक अब तक प्राप्त 67 आवेदनों में से 59 बच्चों के आवेदन का सत्यापन हो चुका है।

यह वे बच्चे हैं, जिनके माता या पिता महामारी से कालकलवित हो गए हैं। इनके लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत सहायता दिए जाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। फिलहाल तीन माह का बारह-बारह हजार रुपये के हिसाब से सभी 59 बच्चों का बजट जिले को प्राप्त हो गया है। उनके खातों में इस धनराशि को भेजने की तैयारी की जा रही है।

शहर से तकरीबन 14 किमी दूर के एक गांव में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे एक छात्र की पत्नी की मौत कोरोना से हो गई। पति बेरोजगार है, लिहाजा पारिवारिक भरण-पोषण का दायित्व पत्नी संभाल रही थी। वह ब्यूटी पार्लर के जरिए अपने कर्तव्य का निर्वहन बखूबी कर रही थी, लेकिन अचानक महामारी इस परिवार के लिए काल बनकर आई। बेरोजगार छात्र की पत्नी को अपने गाल में समा ले गई। इससे परिवार पर कहर सा आन पड़ा। चार छोटे-छोटे बच्चे बिना मां के हो गए। सबसे बड़ा बच्चा अभी नौ साल का है। उसकी आंखों में अपनी मां की तस्वीर अब भी घूमती रहती है। सबसे छोटा बच्चा तो सिर्फ मां शब्द के अलावा और कुछ नहीं बोल पाता। वह यह भी नहीं जानता कि कोरोना क्या है और उसने मां की गोद को उससे क्यों छीन लिया। वहीं पति भी बीते पलों को याद कर भावुक हो उठता है। फिलहाल उसे और इस बीमारी से पीड़ित अन्य परिवारों को भी सरकार के मदद का भरोसा है। गुरुवार को जब चारो बच्चों को एक साथ मुख्यमंत्री बाल विकास योजना के तहत मदद का स्वीकृति पत्र अधिकारियों के हाथ से मिला तो वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि यह आखिर क्या है, लेकिन पति की आंखों में आंसू भर आए..।

यह है योजना :

मुख्यमंत्री बाल विकास योजना के तहत चिह्नित किए गए बच्चों को चार-चार हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा। उनके बालिग होने तक यह सहायता राशि उन्हें मिलती रहेगी। वहीं, 11 से 18 तक की आयु के बच्चों को अटल आवासीय व कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। अनाथ लड़कियों को विवाह योग्य होने पर एक लाख एक हजार रुपये की आर्थिक मदद, कक्षा नौ या इससे ऊपर के विद्यार्थियों को लैपटाप व टैबलेट की सुविधा मिलेगी।