अखंडनगर (सुलतानपुर) : तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश है। इस निर्देश के अनुपालन की कौन कहे तालाब को ही पट्टा कर दिया जा रहा है। ऐसा ही मामला अखंडनगर विकास खंड के प्राणनाथपुर बछेड़िया में सामने आया। तीन बीघे का तालाब अब पांच बिस्वा में सिमट कर रह गया है। बताया जाता है कि यह 100 वर्ष से भी पुराना है।

भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाने के लिए तालाबों को गहरा करने, अवैध कब्जे से मुक्त कराने और उसे पानी से लबालब करने के शासनादेश जारी किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह तालाबों की पहचान कर उन्हें उनके स्वरूप में वापस लाएं, पर अखंडनगर में ऐसा नहीं हो रहा है। यहां कई तालाब अवैध कब्जे के शिकार है। कागजों में हेराफेरी कर या तो उन परदावा ठोंका जा रहा है अथवा दूसरे के नाम कूटरचित तरीके से पट्टा कर दिया जा रहा है। प्राणनाथपुर बछेड़िया गांव के तालाब के किनारे हनुमानमंदिर होने से यह गंवई सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र है। नागपंचमी को गुड़िया पीटे जाने के अलावा कई लोकाचार इस तालाब में निभाए जाते हैं। जिस तरह साजिश के जरिए इसके अस्तित्व को मिटाने का प्रयास हो रहा है, उससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय पशु, पक्षी, इंसान सभी के लिए सहारा बने जलाशय के अस्तित्व खतरे में है। ग्राम प्रधान राम अनुज मौर्य कहते हैं कि पहले गाटा संख्या 1191 को क और ख दो भाग में बांट दिया गया। इसके बाद पट्टा करने का सिलसिला शुरू हो गया। नियमत: ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि पहले तालाब का रकबा तीन बीघे से ज्यादा था, अब पांच विस्वा के आसपास ही रह गया है। तालाब के किनारे भीटा भी नहीं दर्ज है तो कैसे पट्टा हुआ तआजुब है। उपजिलाधिकारी कादीपुर जयकरन ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच कराऊंगा। गलत तरीके से किए गए पट़टे निरस्त कर तालाब के स्वरूप को निखारा जाएगा।

Posted By: Jagran