संजय तिवारी, सुलतानपुर :

पंचायतराज व्यवस्था के तहत गांवों को शहरी जीवन जैसा लुक देने के सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी जिन्हें सौंपी गई उन्होंने भ्रष्टाचार का रास्ता चुन लिया। फिर विभिन्न विकास योजनाओं के लिए आए पैसे में भ्रष्टाचार का घुन ऐसा लगा कि करोड़ों रुपया खर्च करने के बाद भी गांव लकदक नहीं हो सके। बिरला गांव ही होगा जहां सरकारी धन के दुरुपयोग व अनियमितता की शिकायत न होती हो। ऐसे ही धन गबन के कई मामले प्रशासन तक पहुंचे, तो जांच कमेटी बना दी गई। कुछ की रिपोर्ट आई तो कुछ रिपोर्ट देना मुनासिब ही नहीं समझे। कई कमेटियों ने ते अभी तक जांच भी शुरू नहीं की। इससे कई बड़े मामले ठंडे बस्ते में चले गए। ऐसे में दोषियों की मौज हो गई और शिकायतकर्ताओं की उम्मीदों पर पानी फिरने लगा है।

लंबित हैं 105 जांच

13 वें व 14 वें राज्य वित्त आयोग, मनरेगा आदि से जुड़ी 105 जांचें लंबित हैं। पंचायत राज विभाग के आंकड़ों के मुताबिक भूमि संरक्षण 6, कृषि रक्षा 4, सहायक निबंधक सहकारी 4, डीएसटीओ 7, कार्यक्रम अधिकारी 4, आबकारी 6, समाज कल्याण 8, डीडी कृषि 6, पीडी 6 तो बानगी है।

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अधिकांश में शुरू नहीं हुई जांच

धनपतगंज विकास खंड के सरैयामाफी, बिनगी, ममंदीपुर आदि गांवों की जांच के लिए एक साल पहले जांच कमेटी बनी, जिसका नतीजा सामने नहीं आया। इसी तरह कादीपुर विकास खंड के सैदपुर कला, खानपुर पिलाई जैसे 53 गांवों की भी रिपोर्ट मुख्यालय नहीं पहुंच सकी।

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रसूख से बदल जाती है जांच कमेटी

मैरी रंजीतपुर गांव में सोलर लाइट, नाली, खड़ंजा इत्यादि के लिए पैसे के गबन को लेकर जांच कमेटी बनी। इसमें पौने आठ लाख रुपये के आसपास का घपला पकड़ा तो संबंधित प्रधान अपने रसूख के चलते डिप्टी सीएम से नई कमेटी बनाने का फरमान जारी करा दिया। अब नए सिरे से जांच होगी।

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लंबित जांच पूरी करने के लिए संबंधित कमेटियों को निर्देश जारी कराया जाएगा। ताकि आरोपितों पर दोष सिद्ध होने के बाद कार्रवाई हो सके।

डॉ.निरीशचंद्र साहू, डीपीआरओ।

Posted By: Jagran

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