जीतेन्द्र श्रीवास्तव, सुलतानपुर

सात साल पहले आम आदमी पार्टी के संघर्ष में शामिल रहे साथी जब अदालत में सहअभियुक्त की तरह आए तो दिल्ली सीएम अरविद केजरीवाल उनसे भी मिले, जितनी देर वह कोर्ट में रहे, मुस्कुराते ही रहे। सुप्रीमकोर्ट से व्यक्तिगत हाजिरी पर स्टे होने के बावजूद अदालत में आने के सवाल पर बोले कि मुकदमे का विचारण जल्द पूरा हो, इसलिए स्वेच्छा से हाजिर होने आया हूं।

दिल्ली की जनता के साथ केजरीवाल का सौम्य व्यवहार चर्चा में रहता है। कुछ ऐसा ही नजारा सोमवार को अदालत में भी दिखा। 2014 में जो साथी उनके साथ अमेठी की सड़कों पर संघर्ष करते थे, जब वह उनसे मिले तो मुस्कुरा दिए। जो भी मिला उसका हाथ जोड़ अभिवादन भी किया। एक समय ऐसा भी आया कि काफी संख्या में वर्दीधारी कोर्ट रूम व उसके आसपास जमा हो गए तो जज ने पुलिस अफसर से कहकर कुछ सुरक्षाकर्मियों को वहां से हटवा दिया।

दो मुकदमों में हुई पेशी : जिन दो मुकदमों में आज केजरीवाल की जमानत हुई, उनमें एक गौरीगंज में 20 अप्रैल 2014 को जिपं के कार्यकारी अधिकारी जगप्रसाद मौर्य ने बतौर जोनल मजिस्ट्रेट दर्ज कराया था। इसमें केजरीवाल के साथ नामजद राकेश तिवारी, हरिकृष्ण व अजय विक्रम आज हाजिर रहे, जबकि कुमार विश्वास व बबलू तिवारी अनुपस्थित रहे। दूसरा मुकदमा मुसाफिरखाना कोतवाली में चार मई को उड़नदस्ता मजिस्ट्रेट प्रेमचंद ने दर्ज कराया था, जिसमें दो दिन पहले आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप है। इन मुकदमों में अब तीन नवंबर को पेशी है।

इनसेट -

ये बने दिल्ली सीएम के जमानतदार

कोर्ट में जिन लोगों ने दिल्ली के मुख्यमंत्री की जमानत ली है, वे आरोपित को अदालत में हाजिर करने के जिम्मेदार बन गए हैं, उनके लिए अपनी प्रतिभू दाखिल करने वाले शहर में गोविदनगर निवासी अनुज दुबे, जयसिंहपुर के रामविलास तिवारी, परस पट्टी मोतिगरपुर के राकेश सिंह और कोतवाली देहात सोनबरसा के इसराक अहमद हैं।

Edited By: Jagran