सुलतानपुर: फोन बंद होने के बाद अपहर्ताओं तक पहुंचना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था। उनका दावा है कि लोकेशन मिलने पर 100 से अधिक घरों की तलाशी ली गई। बावजूद दिन में वह अपहर्ताओं तक नहीं पहुंच सकी। मोहल्लेवासियों को भी अपहर्ताओं की गतिविधियों की कोई भनक नहीं होने से पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी और देर रात पहुंची। इस दौरान अपहर्ता दोनों बच्चों को मारकर गोमती नदी में फेंकने की तैयारी कर चुके थे। दूसरे बच्चे की सांस चलते देख उसे अस्पताल ले जाया गया। जिस नंबर से फिरौती के लिए कॉल की गई थी वह किसी अन्य के नाम दर्ज है।

कपड़ा दिलाने के बहाने उतारा मौत के घाट

स्कूल के गेट से बच्चों को अपनी बाइक से बैठाने के बाद अपहर्ता बच्चों को यह कहकर शहर की ओर लाए कि तुम्हारे पापा बाजार में मिलेंगे और सर्दी का कपड़ा खरीदेंगे। यह भरोसा पाने के बाद बच्चे बगैर कोई विरोध किए उनके साथ चले गए। वहां अपहर्ताओं ने खुद को फंसता देख उन्हें मौत के घाट उतारकर लाश को ठिकाने लगाना ही उचित समझा, लेकिन पुलिस ने उनकी मंशा को पूरी तरह कामयाब नहीं होने दिया।

जागरूकता अभियान चलाएगी पुलिस

स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाएगी। साथ ही सभी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगाने को भी प्रेरित व निर्देशित करेगी। ताकि भविष्य में होने वाली इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

सहमे अभिभावक व बच्चे

घटना के बाद से सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के अन्य बच्चों व अभिभावकों में दहशत बैठ गई है। वह अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। घटना के तीसरे दिन भी स्कूल पर ताला लगा रहा। पुलिस ने स्कूल प्रबंधन को गेट पर सीसीटीवी कैमरा लगाने का भी निर्देश दिया है।

वकीलों ने कहा- कोई नहीं लड़ेगा अपहर्ताओं का केस

बार एसोसिएशन की ओर से अपील की गई है कि यह नृशंस हत्या है। इसलिए कोई भी वकील अपहर्ताओं व हत्यारों का केस न लड़े।

करौंदिया में जिस स्थल पर घटना को अंजाम दिया गया। उसी मकान के बगल किराये पर रहने वाले छात्र राजीव ¨सह, सुनील कुमार का कहना था यदि सोशल मीडिया पर हम लोगों को जानकारी मिली होती तो शायद हम लोग भी आसपास नजर रखते।

Posted By: Jagran

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