सोनभद्र के बांधों में पानी बढ़ा तो बिजली प्रबंधन का खर्च घटा, 441 मेगावाट सस्ती बिजली
सोनभद्र के जलाशयों में मानसून की भरपूर बारिश से जल विद्युत परियोजनाओं का उत्पादन बढ़ा है। इससे प्रतिदिन 11 मिलियन ...और पढ़ें

सोनभद्र के बांधों में पानी बढ़ने से बिजली उत्पादन बढ़ा, प्रबंधन को करोड़ों की बचत।
HighLights
मानसून से सोनभद्र के जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ा।
जल विद्युत परियोजनाओं से 441 मेगावाट बिजली उत्पादन।
सस्ती बिजली से बिजली प्रबंधन का खर्च घटा।
जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र)। मानसून की भरपूर बारिश ने इस बार सिर्फ जलाशयों को ही नहीं भरा, बल्कि बिजली उत्पादन की तस्वीर भी बदल दी है। प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से जल विद्युत परियोजनाओं की इकाइयां पूरी क्षमता के करीब संचालित की जा रही हैं। इससे रोजाना 11 मिलियन यूनिट से अधिक सस्ती बिजली ग्रिड को मिल रही है।
सोमवार सुबह रिहंद, ओबरा और खारा जल विद्युत परियोजनाओं की 12 इकाइयों से कुल 441 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा था। जल विद्युत से मिलने वाली सस्ती बिजली ने महंगी दरों पर बिजली खरीद की जरूरत भी काफी हद तक कम कर दी है। इससे बिजली प्रबंधन को रोजाना करोड़ों रुपये की बचत का रास्ता बना है।
अगस्त के दूसरे पखवाड़े में सोनभद्र समेत सीमावर्ती क्षेत्रों में हुई अच्छी बारिश का सीधा असर रिहंद और ओबरा जलाशयों पर पड़ा। जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण दोनों बांधों के फाटक खोलकर पानी की निकासी तक करनी पड़ी। रिहंद जल विद्युत परियोजना की सभी छह इकाइयों से 285 मेगावाट, ओबरा जल विद्युत गृह की तीन इकाइयों से 89 मेगावाट और खारा जल विद्युत परियोजना की तीन इकाइयों से 67 मेगावाट उत्पादन किया जा रहा था।
11 मिलियन यूनिट से अधिक सस्ती बिजली रोजाना
जलाशयों में पर्याप्त पानी होने से प्रदेश की जल विद्युत परियोजनाओं की सभी उपलब्ध इकाइयों को लगातार चलाया जा रहा है। जल विद्युत उत्पादन की लागत तापीय व बाजार से खरीदी जाने वाली बिजली की तुलना में कम होने के कारण इसका सीधा लाभ बिजली प्रबंधन को मिल रहा है। उत्पादन बढ़ने से पीक डिमांड के दौरान महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता भी कम हुई है।
रिहंद-ओबरा के पानी से तापीय परियोजनाओं को भी संबल
सोनभद्र को प्रदेश का ऊर्जा हब माना जाता है। यहां प्रदेश और केंद्रीय सेक्टर की कई बड़ी तापीय परियोजनाएं स्थापित हैं। इन परियोजनाओं में शीतलन के लिए रिहन्द और ओबरा बांध के पानी का उपयोग होता है। ऐसे में जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होना तापीय इकाइयों के संचालन के लिए भी राहत भरा है। पानी की उपलब्धता बेहतर रहने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका कम हुई है।
