सोनभद्र में ट्रस्ट के खाते से 2.37 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन में तीन आरोपित गिरफ्तार
सोनभद्र में दुद्धी पुलिस ने सत्य सनातन ट्रस्ट के खाते से 2.37 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के आरोप में ...और पढ़ें

सोनभद्र में 2.37 करोड़ की साइबर ठगी, ट्रस्ट के खाते से फर्जीवाड़ा कर तीन गिरफ्तार।
HighLights
सत्य सनातन ट्रस्ट खाते से 2.37 करोड़ की साइबर ठगी।
दुद्धी पुलिस ने तीन आरोपितों को किया गिरफ्तार।
फर्जी दस्तावेजों से खाता खोलकर रकम ट्रांसफर की गई।
जागरण संवाददाता, सोनभद्र। दुद्धी कोतवाली पुलिस ने सत्य सनातन ट्रस्ट के नाम से पंजीकृत खाते से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के आरोप में रविवार को तीन आरोपितों को रेलवे स्टेशन परिसर रोड दुद्धी से सुबह करीब पौने सात बजे गिरफ्तार कर लिया।
पकड़े गए तीनों आरोपित चंदौली जनपद के नाैगढ़ थाना क्षेत्र के बग बगही गांव निवासी मुख्य आरोपित हरिकेश पांडेय उर्फ ऋषिकेश, दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के महुअरिया गांव निवासी अंजनी कुमार और रजखड़ गांव निवासी वेदांत मौर्या का चालान कर दिया। उनके पास से तीन मोबाइल बरामद किया है। संबंधित खाते से 2.37 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन से जुड़ी 35 साइबर फ्राड शिकायतें सामने आई थीं।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बताया कि समन्वय (जेएमआइएस) पोर्टल पर उपलब्ध संदिग्ध बैंक खातों की जांच के दौरान 16 अक्टूबर को सस्पेक्ट ब्रांच टैप पर सत्य सनातन ट्रस्ट के नाम से पंजीकृत बैंक खाता के संबंध में साइबर फ्राड से जुड़ी कुल 35 शिकायतें दर्ज पाई गईं।
जांच में उस खाते से लगभग दो करोड़ 37 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी प्राप्त हुई, जिसके संबंध में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक धीरेंद्र कुमार चौधरी की तहरीर पर शनिवार को मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक विश्वनाथ प्रताप सिंह के अलावा कस्बा चौकी प्रभारी संजय सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मी शामिल रहे।
बता दें कि साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक धीरेंद्र चौधरी ने शनिवार को दुद्धी कोतवाली में तीनों आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। तहरीर में कहा है कि संबंधित खाते से करीब दो करोड़ 37 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। बैंक से खाता खोलने के आवेदन पत्र और विवरण प्राप्त कर जांच की गई तो खाता सत्य सनातन ट्रस्ट के नाम पर संचालित मिला।
आरोप है कि ट्रस्ट के दस्तावेजों में कथित रूप से कूटरचना कर उसकी वार्षिक आय 20 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक दर्शाई गई और इसी आधार पर खाता खुलवाया गया। पुलिस का आरोप है कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम इस खाते में स्थानांतरित की गई।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से खाते में धनराशि पर बार-बार रोक लगाए जाने के बावजूद कथित तौर पर रकम दूसरे खातों में भेजी जाती रही। तहरीर में आशंका जताई गई है कि इस प्रक्रिया में एक गिरोह और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से धनराशि का अनधिकृत हस्तांतरण किया गया।
