सोनभद्र में खुलेगा प्रदेश का सबसे बड़ा डाटा सेंटर, 2030 तक देश की क्षमता हो जाएगी 13 गीगावाट
सोनभद्र में उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा डाटा सेंटर स्थापित किया जाएगा, जो देश के 2030 तक 13 गीगावाट डाटा ...और पढ़ें

सोनभद्र में बनेगा प्रदेश का सबसे बड़ा डाटा सेंटर, 2030 तक भारत की डाटा क्षमता में होगी बड़ी वृद्धि।
HighLights
सोनभद्र में प्रदेश का सबसे बड़ा डाटा सेंटर स्थापित किया जाएगा।
भारत 2030 तक 13 गीगावाट डाटा क्षमता का लक्ष्य रखेगा।
यह परियोजना सोनभद्र में हजारों प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
मुकेश चंद्र श्रीवास्तव, सोनभद्र। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब डाटा को सुरक्षित रखने और तेजी से उपलब्ध कराने की जरूरत भी कई गुना बढ़ रही है। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल सेवाओं तक हर क्षेत्र में बड़ी मात्रा में डाटा तैयार हो रहा है। ऐसे में आने वाला दशक डाटा सेंटरों के विस्तार का होने जा रहा है।
वर्तमान में दुनिया में डाटा सेंटरों की कुल क्षमता करीब 124 गीगावाट है, जिसे वर्ष 2030 तक 170 से 300 गीगावाट तक ले जाने की तैयारी है। भारत भी इस विस्तार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में जुटा है। देश में अभी करीब 1.7 गीगावाट क्षमता है, जिसे 2030 तक 13 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य में उत्तर प्रदेश की भी बड़ी भूमिका तय की जा रही है। प्रदेश में चार से पांच बड़े डाटा सेंटर समूह विकसित करने की तैयारी है। पहले चरण में मीरजापुर और सोनभद्र को इसके लिए चुना गया है। सोनभद्र में दो स्थानों पर 100-100 एकड़ भूमि चिन्हित कर ली गई है। शासन स्तर से जल्द ही टीम भेजकर स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद जमीन की उपलब्धता, बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं का आकलन कर अगली प्रक्रिया शुरू होगी।
एआइ के लिए बनेगा डाटा का शहर, एक साथ कई केंद्रों की योजना
भविष्य में एआइ के लिए जिस बड़े पैमाने पर डाटा की जरूरत होगी, उसे देखते हुए अकेले एक-दो केंद्र पर्याप्त नहीं होंगे। इसी वजह से बड़े डाटा सेंटर समूह विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इन केंद्रों में विशाल मात्रा में डाटा का भंडारण, प्रसंस्करण और आदान-प्रदान किया जा सकेगा।
प्रदेश के नियोजन विभाग की पहल पर बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप को परामर्शदाता के रूप में जोड़ा गया है। सोनभद्र में ओबरा तहसील के कोटा और दुद्धी तहसील के आरंगपानी में जमीन चिन्हित की गई है। फिलहाल दोनों स्थानों पर 100-100 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की तैयारी है। भविष्य में आवश्यकता बढ़ने पर भूमि का दायरा 300 से 400 एकड़ तक किया जा सकता है।
सस्ती जमीन, भरपूर बिजली-पानी ने सोनभद्र को बनाया दावेदार
डाटा सेंटर के लिए केवल जमीन पर्याप्त नहीं होती। इसके साथ लगातार और अपेक्षाकृत सस्ती बिजली, पर्याप्त पानी तथा बेहतर संपर्क व्यवस्था भी जरूरी है। सोनभद्र में इन सुविधाओं की उपलब्धता इसे इस परियोजना के लिए उपयोगी बनाती है। यहां से सेंटर बनेंगे वहां से विंध्य एक्सप्रेसवे भी गुजरेगा। साथ ही जिले में बड़े विद्युत उत्पादन केंद्रों के साथ औद्योगिक गतिविधियों का पहले से मजबूत आधार है। इनके निर्माण से केवल निवेश नहीं आएगा, बल्कि आसपास के क्षेत्र में सड़क, आवास, बाजार और अन्य सुविधाओं का भी विस्तार होगा। इससे वर्तमान औद्योगिक नगरों की तर्ज पर नए शहरी क्षेत्र विकसित होने की संभावना है।
पांच हजार तक युवाओं को मिल सकता है प्रत्यक्ष रोजगार
डाटा सेंटर स्थापित होने पर सूचना प्रौद्योगिकी, विद्युत, सुरक्षा, रखरखाव, नेटवर्क संचालन समेत कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार एक बड़े केंद्र से पांच हजार तक युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। इसके अलावा परिवहन, खानपान, आवास, निर्माण और अन्य सेवाओं में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
एआइ और डिजिटल प्लेटफार्म के बढ़ते उपयोग के कारण डाटा सेंटर की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। इसी के तहत सोनभद्र में भी डाटा सेंटर बनाने की पहल शासन स्तर से की गई है। कोटा व आरंगपानी में भूमि चिन्हित कर ली गई है। जल्द ही शासन की टीम स्थलीय निरीक्षण करेगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
