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सोनभद्र में राख और कोयले से दबी शक्तिनगर-अनपरा की लाइफलाइन

By Ambarish Sharma NikkuEdited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 26 Oct 2026 07:23 PM (IST)

सोनभद्र के शक्तिनगर-अनपरा क्षेत्र में ऊर्जा कंपनियों से निकलने वाली राख और कोयले का अनियंत्रित परिवहन गंभीर प्रदूषण फैला रहा ...और पढ़ें

सोनभद्र में राख और कोयले के प्रदूषण से दम घोंटती शक्तिनगर-अनपरा की लाइफलाइन।

सोनभद्र में राख और कोयले के प्रदूषण से दम घोंटती शक्तिनगर-अनपरा की लाइफलाइन।

HighLights

  1. शक्तिनगर-अनपरा मार्ग पर राख-कोयले का अनियंत्रित परिवहन।

  2. पर्यावरण और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर।

  3. सांस संबंधी बीमारियाँ, घरों-दुकानों पर काली परत।

अंबरीश शर्मा निकू, सोनभद्र। सोनभद्र को सोनांचल व ऊर्जांचल भी कहा जाता है। कारण कि ऊर्जा उत्पादन के लिए कई कंपनियां भी यहां संचालित हो रही है। इससे लाभ भी है, लेकिन कुछ की मनमानी से क्षेत्र के लोगों का जीवन स्तर भी प्रभावित हो रहा है। कंपनियों से निकलने वाली राख की मानक के विपरीत ढुलाई हो रही है।

तमाम ठेकेदार अधिकारियों से मिलीभगत कर रास्ते में ही राख गिराते हुए भारी वाहनों से गुजर रहे हैं। इससे जिले के पर्यावरण पर तो असर पड़ ही रहा है। साथ ही आसपास में रहने वाले एवं वहां से गुजरने वाले लोगों की सेहत पर भी असर पड़ रहा है। वहां के घरों व पौधों पर राख की काली परत जम गई है।

राख के कण श्वास के माध्यम से शरीर में भी असर छोड़ रहे हैं। यही कारण कि वहां के लोगों को अक्सर ही सर्दी, खांसी, एलर्जी आदि की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके कंपनियों के अधिकारी या संबंधित विभाग कोई ठाेस कदम नहीं उठा पा रहे हैं।

ऊर्जाचल की लाइफ लाइन कहे जाने वाली शक्तिनगर-अनपरा स्टेट हाईवे फोरलेन सड़क से यात्रा करना इनदिनों काला पानी की सजा से कम साबित नहीं हो रहा है। अगर मोटरसाइकिल से अनपरा से शक्तिनगर जाना हो तो बाइक सवार को सोच समझ कर जाना पड़ता है।

पहले तो वह अपने आप को गमछे से पूरा ढक लेते है तथा हेलमेट लगाने के बाद ही यात्रा करते है। अन्यथा उनका पूरा मुंह काले धूल से भर जाता है। यही नहीं आसपास में रहने वालों का जीवन भी दुभर हो गया है। अनपरा, खड़िया के साथ ही अन्य तापीय परियोजनाओं से मनमाने ढंग से राख का परिवहन हो रहा है। ओवरलोड गाड़ियां भी निकल रही है। खासकर मध्य प्रदेश से आने वाली। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

उनका कहना है क‍ि मजबूरी बस वह जो काम करते हैं उन्हें तो ड्यूटी जाना ही पड़ेगा। वापस आने पर घर के लोग सकुशल लौटने के लिए प्रभु से प्रार्थना करते हैं। जब इस मार्ग से कोयला परियोजनाओं से कोयला परिवहन कर रहे भारी वाहन गुजरते हैं तो सड़क खराब होने के कारण उबड़ खाबड़ सड़कों पर कोयला गिरता है जिस कारण भारी वाहनों के टायर के नीचे आने से वह चुरा बन जाता है और जब वहां से भारी वाहन गुजरते हैं तो और डस्ट के रूप में उड़ता है।

अगर लोडिंग में कोई रुकावट नहीं उत्पन्न होती है तो पीसी मशीनों द्वारा लोडिंग सही ढंग से होती है तो खड़िया स्थित राख बांध से प्रतिदिन लगभग 200 से लेकर 250 तक वाहन राख लेकर अपने गंतव्य के लिए निकलते हैं। इसमें लगभग 35 टन से 40 टन के लगभग राख लोड होती है। बाडी ट्रक में इसका कोई अंदाजा नहीं होता। इस क्षेत्र से गुजरने वाले ट्रक, ट्रेलर तो तिरपाल का इस्तेमाल राख व कोयला ढकने का प्रयास करते हैं, लेकिन वह नाकाफी साबित होते हैं।

कुछ कोयला परियोजनाएं पानी का छिड़काव तो वाटर टैंकर के माध्यम से करती हैं मगर वह भी नियमित नहीं है। लोगों का कहना है कि घर में दिन भर में कम से कम तीन से चार बार साफ सफाई करनी पड़ती है।

दुकानदारों का कहना है कि इस डस्ट के कारण दुकानदारी प्रभावित हो गई है। सबसे ज्यादा असर बच्चे व बूढ़ों पर पड़ता है। उनकी आंखों में दिक्कत हो रही है। श्वास संबंधी बीमारी, सर के बाल झड़ने, खांसी आने पर बलगम आदि की समस्या बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि दिनभर दस्त के कारण घर के दरवाजे बंद कर कर रखना पड़ता है।

सड़क पर उड़ रही धूल के कारण व्यवसाय प्रभावित हो गया है। धूल से सांस की बीमारी उत्पन्न हो रही है। बाल झड़ना शुरू हो गयाय है। सड़क किनारे रहना दुश्वार हो गया है। - विनोद कुमार जायसवाल, किराना व्यवसायी

फोरलेन सड़क किनारे नाली बंद होने व भर जाने से बरसात में पानी सड़क पर ही रह गया। इसके कारण बांसी स्थित मार्ग की सड़क जल्दी खराब हो गई है। कोयला और राख का डस्ट ने और अधिक परेशानी बढ़ा दी है। अगर जिम्मेदार अधिकारी इस क्षेत्र में ध्यान देते तो इस तरह की समस्या यहां उत्पन्न नहीं होती। -लाल बिहारी सिंह, समाजसेवी

खांसी आने पर बलगम में देखने पर काले-काले कोयला के अंश दिखाई देते हैं। घर से निकलने पर कपड़ा जल्दी गंदा हो जाता है। मार्ग के किनारे रह रहे लोगों को सांस की परेशानी होने लगी है। - राजेश कुमार, जनरल स्टोर व्यवसायी