जासं, ओबरा (सोनभद्र) : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को कांवेंट तिराहे पर ओबरा के प्रभागीय वनाधिकारी का पुतला फूंककर विरोध जताया।  इस दौरान  परिषद के प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य विपुल शुक्ला ने आरोप लगाया कि ओबरा वन क्षेत्र के वनाधिकारी द्वारा मनमाने ढंग से केंद्र और प्रदेश सरकार के वन अधिनियमों को ताक पर रखकर खनन नीतियों के निर्धारित मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस वजह से खनन व्यवसायियों समेत स्थानीय मजदूर रोजी-रोटी के व्यापक संकट से गुजर रहे हैं।

नगर अध्यक्ष कुमार सौरभ सिंह ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित सर्वे एजेंसी द्वारा सर्वे प्रक्रिया समाप्त करके वन सचिव एवं राजस्व सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा शपथ पत्र उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत कर सर्वे प्रक्रिया समाप्त करने की घोषणा सन 1994 में ही कर दी गई थी। उसके बावजूद भी ओबरा वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लापरवाही एवं लेटलतीफी से धारा 20 के प्रकाशन की कार्रवाई आजतक पूरी नहीं हो पाई है। इस कारण  बर्दिया, सिदुरिया और बिल्ली मारकुंडी के तमाम खनन कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो गए हैं।  इससे प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है। परिषद ने जिला प्रशासन से मांग की है कि होने वाली सम्पूर्ण क्षति की प्रतिपूर्ति वनाधिकारी से कराई जाय वरना परिषद उग्र आंदोलन को बाध्य होगा। पुतला दहन के दौरान परिषद के नगर मंत्री अभिषेक अग्रहरि, राहुल वर्मा, अमित, कल्लू, संदीप जायसवाल मौजूद रहे।

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Posted By: Jagran

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