विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

60 हजार आबादी, 75 टोले और 30 KM में फैला सोनभद्र का जुगैल, देश के सबसे बड़े गांवों में से है एक; बुनियादी सुविधाएं बनी चुनौती

Published: Fri, 16 Oct 2026 10:15 PM (GMT+05:30)

सोनभद्र की जुगैल ग्राम पंचायत, जो 60 हजार आबादी और 75 टोलों में 30 किलोमीटर तक फैली है, देश के ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. सोनभद्र का जुगैल 60 हजार आबादी, 75 टोलों में फैला।

  2. पानी, सड़क, बिजली, नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव।

  3. नेटवर्क सुधारने हेतु तीन और मोबाइल टावर लगाने की योजना।

मुकेश चंद्र श्रीवास्तव, सोनभद्र। देश में चार राज्यों बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से सटा सोनभद्र भौगोलिक विविधता के लिए जाना जाता है। यहां की ग्राम पंचायतें भी अपनी अलग पहचान रखती हैं। चोपन ब्लाक की जुगैल और पनारी ग्राम पंचायतें विशाल बसावट और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियों की अलग-अलग तस्वीर पेश करती हैं। इस कड़ी में जुगैल के आंकड़े खास हैं, लेकिन इन आंकड़ों के बीच ग्रामीणों की समस्याएं भी कम नहीं हैं। पानी, सड़क, बिजली, चिकित्सा व नेटवर्क जैसी सुविधा के लिए भी यहां के लोग आज भी संघर्ष कर रहे है।

75 टोलों में बिखरी 60 हजार आबादी, नेटवर्क की समस्या

जुगैल ग्राम पंचायत करीब 60 हजार आबादी और लगभग 32 हजार मतदाताओं वाली पंचायत है। करीब 75 टोलों में फैले इस गांव का एक छोर से दूसरे छोर तक विस्तार लगभग 30 किलोमीटर है। यहां 49 विद्यालय, 1395 हैंडपंप, 302 कुएं और 23 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इसके बावजूद बिखरी बसावट और दुर्गम रास्तों के कारण बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना चुनौती बना हुआ है।

मतदान के समय कर्मियों को मिलता है वायरलेस सेट

पहाड़, जंगल व एक टोले से दूसरे टोले की दूर आठ से दस किलोमीटर होने के कारण यहां पर चुनाव प्रक्रिया भी चुनौतीपूर्ण है। नेटवर्क न होने के कारण यहा के कई बूथ शैडो एरिया में गिने जाते हैं, जिसके कारण कर्मियों को वायरलेस सेट दिया जाता है। मोबाइल नेटवर्क के लिए फिलहाल पंचायत में दो मोबाइल टावर हैं। तीन और टावर लगाने की योजना है। इसके पूरा होने पर नेटवर्क की उपलब्धता बेहतर होने और ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल सेवाओं तथा आपातकालीन संपर्क में सहूलियत मिलने की उम्मीद है।

कुएं-हैंडपंप अधिक, लेकिन पर्याप्त पानी की गारंटी नहीं

जुगैल में 302 कुएं और 1395 हैंडपंप ग्रामीण जीवन में जलस्रोतों की अहमियत बताते हैं। हालांकि, इनकी बड़ी संख्या से हर टोले में पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए जलस्रोतों की मौजूदा स्थिति, उपयोग में आने वाले हैंडपंपों और कुओं की संख्या तथा गर्मियों में पानी की उपलब्धता का आकलन जरूरी है। इसी तरह, पंचायत का करीब 30 किलोमीटर का विस्तार इसे सामान्य गांवों से अलग बनाता है। बड़ा भू-भाग, जंगल व पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां के लोगों का जीवन मुश्किल भरा है।


ऐतिहासिक पहचान, लेकिन योजनाओं का लाभ पहुंचाना चुनौती

विंध्याचल और कैमूर की पहाड़ियों के बीच जंगलों में बसा जुगैल आदिवासी इतिहास, लोककथाओं और प्राकृतिक संपदा के लिए जाना जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र ब्रिटिश काल के मीरजापुर जिले की राबर्ट्सगंज तहसील का हिस्सा था। चार मार्च 1989 को सोनभद्र जिला मीरजापुर से अलग होकर अस्तित्व में आया। विशाल क्षेत्रफल और दुर्गम रास्तों का असर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी पड़ता है। पहाड़ी टोलों में पानी की टंकियां बनी हैं, लेकिन सभी घरों में कनेक्शन नहीं पहुंचे हैं। विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में ई-केवाइसी भी बाधा बनती है।

जुगैल क्षेत्रफल के आधार पर देश के सबसे बड़ गांवों में से एक कहा जा सकता है। इसके साथ ही यहां पर चुनौतियां भी अधिक है। खासकर नेटवर्किंग, कनेक्टिविटी आदि की। यहां की समस्याओं को बारी-बारी से दूर किया जा रहा है। नेटवर्क की समस्या को दूर करने के लिए इस गांव में तीन और मोबाइल टावर लगाए जाने हैं। पांच मोबाइल टावर किसी एक ही गांव में होना भी अपने आप बड़ी बात है। - चर्चित गौड़, जिलाधिकारी, सोनभद्र

जुगैल ग्राम पंचायत नोटिफाइड राजस्व गांव है, राजस्व गांव को बांटा नहीं जा सकता कारण यह शासनादेश में उल्लेखित है। यही कारण है कि तमाम विषमता के बाद भी ग्राम पंचायत को छोटे-छोटे भाग में नहीं किया जा सका है। - जगरूप पटेल, सहायक निर्वाचन अधिकारी।