सोनभद्र पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपितों को जेल भेजा तब सामने आया डेमोग्राफी बदलने का मामला
सोनभद्र में पुलिस की कार्रवाई से डेमोग्राफी बदलने का मामला सामने आया है, जहां आदिवासियों की जमीन धोखे से खरीदकर ...और पढ़ें

सोनभद्र में डेमोग्राफी बदलने की साजिश का खुलासा, आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे।
HighLights
सोनभद्र में आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे का खुलासा।
पुलिस ने डेमोग्राफी बदलने के आरोप में कार्रवाई शुरू की।
प्रशासन 10 साल में बसे बाहरी लोगों की पहचान कर रहा।
जागरण संवाददाता, सोनभद्र। चार राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार व झारखंड की सीमा से सटी सोनांचल की भूमि सााजिशन डेमोग्राफी बदलने के लिए साफ्ट कार्नर बन गई थी। कारण कि यहां पर जंगली क्षेत्र अधिक है। इसी का फायदा उठाते हुए भोलभाले आदिवासियों की जमीन धोखे से खरीदकर मुसलमानों को बसाया जाने लगा।
इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन में पुलिस ने पिछले साल नवंबर में ही मुकदमा दर्ज कर जेल भेजना शुरू कर दिया। इसके बाद तो धीरे-धीरे मामला सामने आने लगा। इससे पहले भाजपा के जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता ने इस प्रकरण को उठाया था।
हालांकि उस समय का तत्कालीन दुद्धी प्रशासन ने इसमें गंभीरता नहीं दिखाई। आरोप तो यह लगे की उस समय के दुद्धी प्रशासन ने इस मामले को दबाने का भी प्रयास किया। हालांकि यह मामला सीएमओ यानी मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका था। इसके बाद इस पर कार्रवाई तेज हो गई।
अब जनपद के दुद्धी, बभनी और कोन ब्लाक क्षेत्रों में पिछले दस वर्षों के दौरान आकर बसे लोगों को चिन्हित करने की प्रक्रिया जिला प्रशासन ने शुरू कर दी है। पिछले साल सामने आए बघाडू प्रकरण के बाद प्रशासन ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, विशेष रूप से ऐसे लोगों की सूची तैयार की गई है, जिन्होंने अनुसूचित जनजाति वर्ग में शादी कर या जमीन खरीदकर इन क्षेत्रों में निवास स्थापित किया है। इसके लिए राजस्व, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें गांव-गांव जाकर जानकारी जुटा रही हैं।
इस मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता और राज्यमंत्री संजीव सिंह गोंड ने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी मुस्लिमों सहित बाहरी लोग अवैध रूप से जंगल और आदिवासी क्षेत्रों में बस रहे हैं। उन्होंने इसे जनसांख्यिकीय और भूमि अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए उच्च स्तर पर कार्रवाई की मांग की थी। पूर्व में आदिवासियों की जमीन खरीद कर मुस्लिमों को बसाने का मामला सामने आया था। इस पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की थी।
ऐसे चला खेल और पुलिस ने की कार्रवाई
- बहादुर अली मूल रूप से ग्राम हरपुरा, तहसील दुद्धी का निवासी है। इसकी पहली पत्नी जमशीदा व उसके छह बच्चे हरपुरा में ही रहते हैं। बहादुर अली ने रजिया उर्फ दुलरिया पुत्री सरदार, उम्र 70 वर्ष, जाति पनिका से वर्ष 1986 के आसपास दूसरी शादी की थी। उससे तीन बच्चे हैं और तीनों बच्चों की शादी हो चुकी है। बहादुर अली रजिया के साथ बघाडू में रहता है।
- बहादुर अली ने वर्ष 2011 से 2023 के बीच रजिया के नाम से जमीन के कुल 12 बैनामे कराए। उन सभी बैनामों की भूमि को राज्य सरकार की संपत्ति घोषित की जा चुकी हैं।
- रजिया ने छह जून 2016 से 10 अगस्त 2025 तक की अवधि में कुल छह लोगों को जमीन बेची। रजिया ने 0.0988हेक्टेयर रकबा पर धारा-80 में अकृषिक घोषित कराया है। एक अन्य महिला नन्हकी पुत्री महाबीर, उम्र 64 वर्ष, भुइया जाति की है। इसका पहला विवाह राजेन्द्र नामक व्यक्ति से बचपन में हुआ था, जिसकी मृत्यु हो चुकी है। इसका दूसरा विवाह पहले पति की मृत्यु के बाद काफी वर्ष पूर्व सिराजुद्दीन से हुआ। नन्हकी का वर्तमान नाम नैमुननिशा है। सिराजुद्दीन से उसे एक लड़का एजाजुद्दीन व एक लड़की हसीन बानो है। दोनो सन्तानो का विवाह मुस्लिम रीति-रिवाज से हो चुका है।
- नन्हकी ने चार नवंबर 2011 से सात अगस्त 2023 तक की अवधि में कुल सात बैनामे (रकबा 0.8625हेक्टेयर) लिए। सभी बैनामों की भूमि को राज्य सरकार में निहित करने हेतु उपजिलाधिकारी के यहां मुकदमा दर्ज है।
- अनुसूचित जनजाति की एक लड़की रेनू कुमारी पुत्री मनोज सिंह गोड़, निवासी ग्राम बघाडू, थाना दुद्धी ने बहादुर अली निवासी ग्राम बघाडू व उसके परिजनों के विरुद्ध एससीएसटी एक्ट व धर्म परिवर्तन संबंधी मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें बहादुर अली की गिरफ्तारी हो चुकी है। विवेचना चल रही है।
