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सोनभद्र की मीरा को माडल, चित्रों और प्रयोगों से बच्चों को शिक्षित करने के लिए मिलेगा राज्य शिक्षक पुरस्कार

By mukesh srivastava Edited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 31 Aug 2026 06:43 PM (GMT+05:30)

सोनभद्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़ईडीह की सहायक अध्यापिका मीरा सिंह को राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। ...और पढ़ें

सोनभद्र की शिक्षिका मीरा सिंह को नवाचारी शिक्षण के लिए राज्य शिक्षक पुरस्कार।

सोनभद्र की शिक्षिका मीरा सिंह को नवाचारी शिक्षण के लिए राज्य शिक्षक पुरस्कार।

HighLights

  1. मीरा सिंह को राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया।

  2. वह मॉडल, चित्रों और प्रयोगों से बच्चों को पढ़ाती हैं।

  3. उनकी पहचान एक रचनात्मक एवं नवाचारी शिक्षिका के रूप में है।

जागरण संवाददाता, सोनभद्र। विकास खंड चोपन के उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़ईडीह की सहायक अध्यापक मीरा सिंह का चयन राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए किया गया है। राज्य स्तरीय चयन समिति की बैठकों में लिए गए निर्णय के बाद जारी 61 शिक्षकों की सूची में मीरा सिंह का नाम भी शामिल है। वे माडल, चित्रों और प्रयोगों से बच्चों को शिक्षित करने का लगातार कार्य कर रही हैं।

मीरा सिंह ने जनपद के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान से बीटीसी प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद वर्ष 2011 में प्राथमिक विद्यालय चोपन में नियुक्त होकर अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत की। वर्ष 2015 में प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नत होकर उन्होंने प्राथमिक विद्यालय यादव बस्ती में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।

वर्ष 2025 में हुए समायोजन के बाद वर्तमान में वह उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़ईडीह, विकासखंड चोपन में सहायक अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। उनकी पहचान एक रचनात्मक एवं नवाचारी शिक्षिका के रूप में है। वह आर्ट एंड क्राफ्ट तथा रचनात्मक टीएलएम के माध्यम से विद्यार्थियों की अधिगम क्षमता को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करती हैं।

उनकी विशेषता यह है कि वह कठिन एवं जटिल विषयों को केवल पारंपरिक तरीके से पढ़ाने के बजाय उन्हें गतिविधियों, मॉडल, चित्रों, कला और प्रयोगों से जोड़कर बच्चों के लिए सरल, सहज और सुबोध बना देती हैं। उनकी कक्षा में गतिविधि आधारित एवं करके सीखने की पद्धति को विशेष महत्व दिया जाता है। बच्चों को विषय की अवधारणाओं को स्वयं अनुभव करने और गतिविधियों के माध्यम से समझने का अवसर मिलता है।

रचनात्मक टीएलएम के प्रयोग से वह अमूर्त एवं कठिन अवधारणाओं को भी बच्चों के अनुभवों से जोड़कर प्रस्तुत करती हैं, जिससे विद्यार्थियों में जिज्ञासा, सहभागिता, कल्पनाशीलता और सीखने की रुचि विकसित होती है। यही उनकी शिक्षण शैली को प्रभावी और विशिष्ट बनाती है। मीरा ने कहा कि उनका प्रयास बच्चों की बेहतरी है। आगे भी वे इस पर निरंतर कार्य करती रहेंगी। उधर बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनंद पांडेय ने इस पर उपलब्धि पर मीरा सिंह को बधाई दी है।