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जासं, सोनभद्र : नेहरू के सपनों का स्विटजरलैंड, पॉवर कैपिटल जैसे तमाम नामों से पहचाने जाने वाले सोन की वादियों को उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने अपनी थाती माना है। यहां के टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए उसने अपने आधिकारिक पोर्टल पर सोनभद्र के वादियों की तस्वीर डालते हुए सोशल मीडिया पर शेयर किया है। साथ ही पर्यटकों को यहां आने के लिए आमंत्रित भी किया है। यानी अब जब पर्यटन विभाग ने इसे हाथोहाथ लिया तो तय है कि मानसून में पर्यटकों का आना होगा। इस तरह से अपना सोनांचल भी नैनीताल जैसी शोहरत पाएगा। यहां पर्यटकों को लुभाने के लिए तमाम ऐसे स्थान हैं।

चंद्रकांता के तिलिस्मी किले, झरने से गिरता मुक्खा फाल का नजारा, करोड़ों वर्ष पुराने सलखन के फासिल्स पार्क सहित हरी-भरी वादियों वाले सोन इको प्वाइंट में मानसून के समय चार चांद लग जाता है। आलम यह होता है कि वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग से जो लोग भी गुजरते हैं तो राब‌र्ट्सगंज से सात किमी की दूरी पर स्थित यहां की वादियों में दो मिनट के लिए ही सही रूककर वहां प्रकृति के नजारे को जरूर निहारते हैं। पहाड़ी से गिरते पानी के बीच कोई इस नजारे को अपने कैमरे में कैद करता है तो कोई यहां रुककर थोड़ा आनंद लेता है। इसी सोन इको प्वाइंट को उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने अपने ट्विटर हैंडल से 12 अगस्त को एक तस्वीर शेयर की। उसमें यहां की खूबसूरती का बखान करते हुए पर्यटकों को आमंत्रित भी किया। ऐसे में अब उम्मीद जताई जा रही है कि जब पर्यटन विभाग ने स्वयं इसे गंभीरता से लिया है तो निश्चित ही यहां बाहर के पर्यटक आएंगे। इससे पर्यटन के क्षेत्र में अब सोनांचल बड़े-बड़े शहरों व बाहर तक जाना जाएगा। वाराणसी से यहां बुलाने की जरूरत

सोनांचल में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बस जरूरत है यहां तक पर्यटकों को लाने की। वाराणसी तक ज्यादातर पर्यटक आते भी हैं। अगर मानसून के दौरान उन्हें सोनभद्र की तरफ किसी तरह से मोड़ दिया जाए तो वे यहां का भी भ्रमण कर सकते हैं। बारिश के मौसम में सोनांचल की वादियों को आसानी से देख सकते हैं। वाराणसी से चलते समय रास्ते में पड़ने वाले मीरजापुर के लखनिया दरी जलप्रपात को भी दिखाया जा सकता है। बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

अगर पर्यटकों का यहां आना होगा तो निश्चित ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सोनांचल में पर्यटक स्थलों के पास अभी तक कोई बड़ा होटल या रेस्टूरेंट नहीं है। क्योंकि लोग कम आते हैं। अगर विदेशी मेहमान आने लगेंगे तो वहां के स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। वे पर्यटकों को घुमाने के साथ ही खान-पान का इंतजाम करके कमाई का जरिया बना सकते हैं। सोनांचल के यह स्थान महत्वपूर्ण

वैसे तो सोनांचल में मानसून के दौरान पूरा इलाका हरा-भरा हो जाता है। लेकिन उसमें भी कुछ स्थान ऐसे हैं जहां पर्यटकों को घुमाने के लिए बेहतरीन जगह हो सकती है। जिला मुख्यालय से महज सात किमी दूर सोन इको प्वाइंट बेहतरीन जगह है। घोरावल का मुक्खा फाल, सलखन का फासिल्स पार्क, विजयगढ़ दुर्ग, ओम पर्वत पर्यटन की ²ष्ट से बढि़या है। आगे बढ़ने पर रेणुकूट का रेणुकेश्वर मंदिर, रिहंद डैम, इधर अबाड़ी, दुद्धी का जोरकहू पिकनिक स्पॉट के रूप में चर्चित है।

Posted By: Jagran

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