जागरण संवाददाता, सोनभद्र/दुद्धी : शब-ए-बारात मुसलमान समुदाय के लोगों के लिए इबादत और फजीलत की रात होती है। इस रात अल्लाह की रहमतें बरसती हैं। इस बार शब-ए-बारात नौ अप्रैल को लॉकडाउन के बीच पड़ने की वजह से घरों में इबादत व रोजा रखने की तैयारी बुधवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कर ली। धर्म गुरु भी लॉकडाउन का पूरा पालन करते हुए घरों में रहकर इबादत करने की अपील की है।

शब-ए-बारात की पूरी रात मुसलमान समुदाय के पुरुष मस्जिदों में इबादत करते हैं और कब्रिस्तान जाकर अपने से दूर हो चुके लोगों की कब्रों पर फातिहा पढ़कर उनकी मगफिरत के लिए अल्लाह से दुआ करते हैं। वहीं, दूसरी ओर मुसलमान औरतें घरों में नमाज पढ़कर, कुरान की तिलावत करके अल्लाह से दुआएं मांगती हैं और अपने गुनाहों से तौबा करती हैं। हालांकि, इस बार लॉकडाउन के चलते पुरुषों को मस्जिदों और कब्रिस्तान में जाने की इजाजत नहीं होगी। इसलिए इस बार पुरुष भी घरों में रहकर नमाज पढ़ेंगे और इबादत करेंगे। इस बात से धर्म गुरु भी लोगों को जागरूक करने के साथ ही घरों में रहकर पूरी कसरत के साथ इबादत करने की अपील कर किए हैं। राब‌र्ट्सगंज स्थित अंजुमन इस्लामिया कमेटी के सदर मुस्ताक खान ने रोजा रखने की फजीलत बताते हुए कहा कि शब-ए-बारात के अगले दिन रोजा रखा जाता है। माना जाता है कि शब-ए-बारात के अगले दिन रोजा रखने से इंसान के पिछली शब-ए-बारात से इस शब-ए-बारात तक के सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। उन्होंने मुसलमानों से जनहित में हुए लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन करते हुए घरों में इबादत करने की अपील की है। दुद्धी के मौलाना मोहम्मद नजीरुल कादरी ने भी लोगों से शब-ए-बारात में मस्जिद व कब्रिस्तान न जाकर घरों में रहकर इबादत करने की अपील लोगों से की है।

Posted By: Jagran

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