जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र) : गतवर्ष 14 अक्टूबर को ओबरा ताप विद्युत घर में लगी आग के बाद फायर फाइटिग सिस्टम लगाने का मामला उत्पादन निगम प्रबंधन के लिए गले की हड्डी बनते जा रहा है। सिस्टम लगाने में आने वाले खर्च को लेकर निगम प्रबंधन सवालों के घेरे में आ गया है। स्थानीय स्तर पर फायर फाइटिग सिस्टम लगाने के लिए लगभग 33 करोड़ का बजट प्रस्तुत करने और नेगोशिएशन करने पर निगम प्रबंधन ने ओबरा में तैनात इं. वीके गौतम, अधीक्षण अभियंता( मुख्यालय) एवं इं.अवधेश कुमार सिंह अधिशासी अभियंता अग्नि सुरक्षा खंड को चार्जशीट दिया था। वहीं अब निगम मुख्यालय द्वारा नियुक्त फर्म द्वारा फायर फाइटिग सिस्टम के लिए लगभग 62 करोड़ का बजट बनाया गया है जो कि पूर्व में 33 करोड़ की तुलना में ज्यादा है। बजट को लेकर चल रही खींचतान ने परियोजना की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया है। अब अभियंता संघ ने उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर मामले में कड़ी नाराजगी जताई है। अभियंता संघ ओबरा-पिपरी क्षेत्र के क्षेत्रीय सचिव अदालत वर्मा ने बताया कि ओबरा तापीय परियोजना की केबिल गैलरी में प्रथम बार वर्ष 1986 में आग लगी थी। वर्ष 1986 से वर्ष 2018 तक ओबरा ताप विद्युत गृह अनवरत संचालित रहा लेकिन अग्नि दुर्घटना के बाद जांच के प्रकरण में निगम प्रबंधन द्वारा तत्कालीन सीजीएम, जीएम, अधीक्षण अभियंता (मुख्यालय) एवं अधिशासी अभियंता को चार्जशीट दे दी गई। अग्नि दुर्घटना के बाद भी इकाइयों का अनवरत संचालन हो रहा है अगर ऐसी परिस्थिति में अग्नि दुर्घटना होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

अभियंता संघ के क्षेत्रीय सचिव अदालत वर्मा ने बताया कि अग्नि दुर्घटना के बाद परियोजना के महत्वपूर्ण संयंत्रों एवं भवनों में स्मोक डीटेक्टर, फायर डीटेक्टर एवं 200 मेगावाट की पांचों यूनिटों की केबिल गैलरी में मल्सी फायर सिस्टम लगाने हेतु मेसर्स विमल फायर से अनुरोध पर बजटरी आफर लिया गया था। जिसके लिए फर्म द्वारा रिपोर्ट हेतु कोई कंसल्टेंसी चार्ज नहीं लिया गया था। बजटरी आफर के आधार पर उक्त कार्यों हेतु लगभग 33 करोड़ की निविदा प्राप्त हुई थी लेकिन निगम मुख्यालय द्वारा उक्त निविदा में कारण दिखाते हुए निरस्त करा दी गई। साथ ही संबंधित अभियंताओं को चार्जशीट भी दे दी गई। श्री वर्मा ने कहा कि संघ के संज्ञान में आया है कि निगम मुख्यालय द्वारा पुन: मेसर्स मेकान रांची से सिगल कोटेशन के माध्यम से निविदा की तकनीकि विशेषीकरण प्राप्त करने हेतु स्थानीय परियोजना प्रबंधन को निर्देशित किया गया है। मेसर्स मेकान द्वारा उपरोक्त कार्यों के मद में बजटरी आफर लगभग रुपया 62 करोड़ का दिया गया है। साथ ही कंसल्टेंसी चार्ज हेतु लगभग 64 लाख का बिल प्रस्तुत किया गया है। अभियंताओं में बढ़ा भय

अभियंता संघ के क्षेत्रीय सचिव ने बताया कि वर्तमान में निगम मुख्यालय द्वारा ओबरा प्रबंधन को वीडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम से निर्देशित किया गया है कि सिगरौली सुपर थर्मल पावर स्टेशन में जाकर उनके अभियंताओं से बात करें कि नये ऑफर पर कितने कार्यों की कटौती की जा सकती है। निगम मुख्यालय अपने स्तर से निर्देशित नहीं कर रहा है कि फायर फाइटिग सिस्टम को लगाने हेतु अमुक कार्य करा ले। ऐसी ऊहापोह स्थिति में संबंधित अभियंता भयभीत हैं कि निगम प्रबंधन के मौखिक निर्देशानुसार फायर फाइटिग सिस्टम लगाने हेतु कीमत में कटौती नहीं की गई तो निश्चित रूप से निगम प्रबंधन उन्हें ही दोषी करार कर दंडित कर देगा।

Posted By: Jagran