विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मत्‍स्‍य पालन में रोबोट और ड्रोन की तकनीक लाएगी क्रांति‍, अनुसंधान अनुदान स्वीकृत किया गया

By mukesh srivastava Edited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 11 Oct 2026 04:47 PM (IST)

सोनभद्र के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज (रेक्स) में मत्स्य पालन में पानी की गुणवत्ता की समस्याओं को हल करने के लिए ...और पढ़ें

सोनभद्र में रोबोट और ड्रोन तकनीक से मत्स्य पालन निगरानी में क्रांति।

सोनभद्र में रोबोट और ड्रोन तकनीक से मत्स्य पालन निगरानी में क्रांति।

HighLights

  1. सोनभद्र में मत्स्य पालन निगरानी हेतु रोबोटिक्स-ड्रोन तकनीक विकसित।

  2. यूपी विज्ञान परिषद से 16.08 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत।

  3. पानी की गुणवत्ता जांचकर मछुआरों का नुकसान रोकेगी प्रणाली।

मुकेश चंद्र श्रीवास्तव, सोनभद्र। प्रदेश में मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का प्रमुख स्तंभ है। हालांकि पानी में घुली हुई आक्सीजन, पीएच मान (किसी तरल विलयन की अम्लता या क्षारीयता मापने का एक पैमाना), मटमैलापन और अमोनिया जैसे तत्वों का स्तर तेजी से बदल रहा है। पानी की गुणवत्ता में थोड़ा सा भी उतार-चढ़ाव मछलियों में तनाव, बीमारियां पैदा कर रहा है।

यह अचानक बड़े पैमाने पर मृत्यु का कारण बन जाता है। इससे मत्स्य पालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके काफी महंगे, श्रमसाध्य और पानी की गहराई में होने वाले प्रदूषण का सही अंदाजा लगाने में असमर्थ होते हैं।

हालांकि इस समस्या को ध्यान में रखते हुए राजकीय इंजीनियरिंग कालेज सोनभद्र (रेक्स) के इलेक्ट्रैनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. प्रशांत पांडेय के नेतृत्व में उप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से अनुसंधान अनुदान स्वीकृत किया गया है। तीन वर्ष की अवधि वाली इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक के माध्यम से बड़े पैमाने पर होने वाले मत्स्य पालन (एक्वाकल्चर) की निगरानी प्रणाली में बदलाव लाना है।

इस समस्या के समाधान के लिए डा. प्रशांत पांडेय और उनकी टीम की ओर एक अत्याधुनिक प्रणाली डिजाइन की जा रही है। इस परियोजना में सह-अन्वेषक के रूप में यहीं के डा. आशीष रंजन मिश्रा हैं। इसके अलावा आइआइआइटी डीएम कुरनूल के डा. विनय कुमार तिवारी व एमएमएमयूटी गोरखपुर के डा. रवि प्रकाश त्रिपाठी भी इसमें शामिल हैं।

परियोजना के लिए 16.08 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान स्वीकृत किया गया है। तीन वर्ष की अवधि वाली इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक के माध्यम से बड़े पैमाने पर होने वाले मत्स्य पालन (एक्वाकल्चर) की निगरानी प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाना है।

तीन चरणों में काम करेगी यह प्रणाली

डा. प्रशांत पांडेय बताते हैं कि यह प्रणाली मुख्य रूप से तीन चरणों में कार्य करेगी। सबसे पहले एक हवाई ड्रोन विशाल तालाबों की सतह का त्वरित निरीक्षण करेगा और सतह पर होने वाले शुरुआती बदलावों का पता लगाएगा। किसी गड़बड़ी का संकेत मिलने पर ड्रोन पानी के नीचे चलने वाले रोबोट को पानी में उतारा जाएगा। यह सबमर्सिबल रोबोट पानी की गहराई में जाकर विभिन्न परतों का अध्ययन करेगा और प्रदूषण के प्रसार का सही खाका तैयार करेगा।

बिना किसी बाहरी क्लाउड सर्वर पर निर्भर रहेगी यह तकनीक

डा. पांडेय के अनुसार इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसका फ़ील्ड प्रोग्रामेबल गेट ऐरे (एफपीजीए) आधारित एज-कंप्यूटिंग सिस्टम है। यह तकनीक बिना किसी बाहरी क्लाउड सर्वर पर निर्भर रहे, रोबोट के भीतर ही रियल-टाइम में एआइ और मशीन लर्निंग माडल चलाती है। इससे ऊर्जा की बचत होती है और रोबोट लंबे समय तक पानी के भीतर कुशलतापूर्वक काम कर सकता है।