जागरण संवाददाता, रामगढ़ (सोनभद्र) : उद्गम स्थल से कई किमी दूर तक विलुप्त हो चुकी जिले की प्रमुख नदी बेलन के जीर्णोद्धार की शुरुआत सोमवार को चतरा ब्लाक के करद गांव में किया गया। यहां जनप्रतिधियों व अधिकारियों ने विधिवत हवन-पूजन किया। जिले के 29 ग्राम पंचायतों से होकर बहने वाली वाली बेलन नदी की लंबाई 49 किमी है। इसके जीर्णोद्धार से प्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन अवधि में भी रोजगार मिलेगा।

लॉकडाउन के कारण सभी जगहों पर काम-काज बंद है। ऐसे में बाहर कमाने गए मजदूर अब घर वापस आ रहे हैं। इस स्थिति में जिला प्रशासन ने लोगों को रोजगार दिलाने के उद्देश्य नदियों के जीर्णोद्धार के लिए हाथ बढ़ाया है। मंशा है कि इससे एक तो नदी की खोदाई हो जाएगी, विलुप्त हो चुकी नदी अपने अस्तित्व में आ जाएगी। और तो और मनरेगा योजना के तहत ग्रामीणों को रोजगार तो मिलेगा ही आस-पास के किसानों के लिए सिचाई का साधन भी तैयार हो जाएगा। सोमवार को चतरा ब्लाक के करद गांव यानी जहां से बेलन नदी का उद्गम स्थल है वहां सांसद पकौड़ी लाल कोल, सदर विधायक भूपेश चौबे, मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार द्विवेदी, जिला विकास अधिकारी रामबाबू त्रिपाठी ने विधिवत हवन-पूजन करके भूमि पूजन किया। इसके बाद अपने हाथों से पांच-पांच फावड़ा खोदाई कर शुभारंभ किया। पूजन कार्यक्रम डा. कृष्णकांत देव ने कराया। इस मौके पर डीसी मनरेगा तेजभान सिंह, बीडीओ चतरा निरंकार मिश्रा, एपीओ पंकज, एडीओ पंचायत कृपाशंकर शुक्ल, ग्राम प्रधान नागेंद्र बहादुर व सचिव विनीत, गुप्त काशी सेवा ट्रस्ट के रवि प्रकाश चौबे आदि मौजूद थे। तीन ब्लाक से होकर बहती है नदी

करद गांव से निकलकर चतरा, राब‌र्ट्सगंज व घोरावल ब्लाक से होते हुए यह नदी मीरजापुर के रास्ते प्रयागराज में पहुंचकर टोंस नदी में मिल जाती है। जिले में कुल 29 ग्राम पंचायतों से होकर बहने वाली इस नदी की जनपद में लंबाई 49 किमी है। यहां मनरेगा योजना के तहत कार्य कराया जाएगा।

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नदी की तलहटी को कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमित कर लिया गया है। उसे खाली कराते हुए सफाई की जाएगी। एक लाख 68 हजार 225 घन मीटर मिट्टी सिल्ट के रूप में निकाला जाना प्रस्तावित है। इसमें 98 हजार 784 मानव दिवस का सृजन होगा। तटों पर पौधरोपण भी किया जाएगा।

- अजय कुमार द्विवेदी, मुख्य विकास अधिकारी।

Edited By: Jagran