सोनभद्र में नाबालिग को बरामद करने के बाद सुलह समझौते का दौर, आरोपित को बचाने का लगा आरोप
सोनभद्र के बभनी थाने में एक नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के गंभीर मामले में पुलिस पर सुलह-समझौते का दबाव ...और पढ़ें

सोनभद्र: नाबालिग दुष्कर्म मामले में पुलिस पर सुलह का दबाव बनाने का आरोप।
HighLights
बभनी पुलिस पर नाबालिग दुष्कर्म मामले में सुलह का दबाव।
रसूखदारों के दबाव में पुलिस कर रही मामले को रफा-दफा।
पीड़ित परिवार को न्याय के लिए थाने के चक्कर लगाने पड़ रहे।
जागरण संवाददाता, बभनी (सोनभद्र)। थाना परिसर इन दिनों न्याय के बजाय अपराधों को रफा-दफा करने का केंद्र बन गया है। थाना क्षेत्र के एक गांव की किशोरी को भगाकर उसके साथ दुष्कर्म करने के गंभीर मामले में पिछले दो दिनों से थाना परिसर के भीतर खुली पंचायत चल रही है। आरोप है कि रसूखदारों के दबाव में आकर पुलिस भी पीड़ित परिवार पर मामले को रफा-दफा करने और सुलह-समझौता करने का भारी दबाव बना रही है।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार की देर रात थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी को पड़ोसी गांव का पिकअप चालक भगाकर ले गया। इसकी सूचना शुक्रवार की सुबह बभनी थाने में दी गई। पुलिस ने दोनों को बरामद भी कर लिया। बरामदगी के बाद जहां नियमानुसार आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए थी, वहीं पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया।
पीड़िता का पिता रोजी-रोटी के सिलसिले में सुदूर चेन्नई में मजदूरी करने गया हुआ है। घर पर पुरुष सदस्य न होने का फायदा उठाकर स्थानीय रसूखदार और पुलिस मिलकर मामले को रफा-दफा करने की साजिश रच रहे हैं। थाने का चक्कर काट रहे बेबस स्वजन, घर के मुखिया की अनुपस्थिति में पीड़िता की लाचार मां, भाई और बहन पिछले दो दिनों से थाने का चक्कर काट रहे हैं। एक तरफ जहां उन्हें न्याय की उम्मीद थी, वहीं थाने के भीतर बैठी पंचायत और पुलिसिया दबाव का आरोप लगा है।
आरोपी पक्ष की ओर से पीड़िता के परिवार को डराने-धमकाने और सामाजिक दबाव बनाने का खेल सीधे पुलिस की नाक के नीचे थाना परिसर में खेला जा रहा है। इस संबंध में जब प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार सरोज से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जांच चल रही है और कार्यवाही की जायेगी।
इस मामले ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और यह दर्शाता है कि कैसे रसूखदारों के प्रभाव में आकर कार्रवाई के बजाय आरोपित को सुकून और पीड़ित परिवार को थाने का चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
