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बारिश थमी तो बढ़ी बिजली की खपत, सोनभद्र में नौ इकाइयों से 4003 मेगावाट उत्पादन ठप

By mukesh srivastava Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 10 Sep 2026 07:11 PM (IST)

बारिश की रफ्तार धीमी पड़ने से उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग में अचानक बढ़ोतरी हुई है, जिससे आपूर्ति बनाए ...और पढ़ें

बारिश थमते ही बढ़ी बिजली की मांग, सोनभद्र में 4003 मेगावाट उत्पादन ठप।

बारिश थमते ही बढ़ी बिजली की मांग, सोनभद्र में 4003 मेगावाट उत्पादन ठप।

HighLights

  1. बारिश धीमी होने से बिजली की मांग में भारी वृद्धि।

  2. सोनभद्र में नौ इकाइयों से 4003 मेगावाट उत्पादन ठप।

  3. बढ़ती मांग पूरी करने को महंगी बिजली खरीद रहा प्रबंधन।

जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र)। प्रदेश में बारिश की रफ्तार धीमी पड़ते ही बिजली की मांग में अचानक बढ़ोतरी हो गई है। तीन दिन की तुलना में नौ सितंबर को बिजली की खपत में लगभग 100 मिलियन यूनिट से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इससे प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना बिजली प्रबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया।

मांग बढ़ने के बीच गुरुवार शाम तक आईपीपी और सार्वजनिक क्षेत्र की नौ इकाइयों से कुल 4003 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप रहा। उत्पादन में आई इस बड़ी कमी ने प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दीं। बिजली की बढ़ती मांग और उत्पादन में कमी के बीच आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए प्रबंधन को निजी एवं केंद्रीय सेक्टरों से अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ी।

इसमें अपेक्षाकृत महंगी बिजली की खरीद कर प्रदेश के उपभोक्ताओं को आपूर्ति उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। बारिश के दौरान मांग में आई कमी से जहां बिजली प्रबंधन को कुछ राहत मिली थी, वहीं मौसम साफ होते ही बढ़ी खपत ने एक बार फिर दबाव बढ़ा दिया है।

गुरुवार शाम तक बंद रहने वाली इकाइयों में पीपीजीसीएल बारा की इकाई संख्या दो, आरपीएससीएल रोजा की इकाई संख्या दो, घाटमपुर परियोजना की इकाई संख्या एक, हरदुआगंज की इकाई संख्या आठ और नौ, ओबरा परियोजना की इकाई संख्या 11, मेजा परियोजना की इकाई संख्या एक तथा ओबरा 'सी' परियोजना की इकाई संख्या एक और दो शामिल रहीं। खास बात यह है कि ओबरा 'सी' की दोनों इकाइयों के बंद होने से 1320 मेगावाट क्षमता का उत्पादन प्रभावित है।

वहीं प्रदेश की अन्य परियोजनाओं में भी इकाइयों के बंद रहने से उपलब्ध उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा है। ऐसे में मांग और उपलब्ध बिजली के बीच अंतर को पाटने के लिए प्रबंधन को वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ा। आने वाले दिनों में मौसम और बिजली की मांग की स्थिति के साथ बंद इकाइयों की बहाली आपूर्ति व्यवस्था के लिए अहम मानी जा रही है।