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अक्टूबर आते ही सतर्क हो जाते हैं सोनभद्र के लोग, छत्‍तीसगढ़ से जंगली हाथी आकर मचाते हैं तांडव

By mukesh srivastava Edited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 19 Sep 2026 05:33 PM (IST)

सोनभद्र के जंगलों में अक्टूबर से जनवरी के बीच छत्तीसगढ़ से हाथियों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे स्थानीय लोग ...और पढ़ें

सोनभद्र में अक्टूबर से बढ़ती हाथियों की हलचल, छत्तीसगढ़ से आने वाले झुंडों से ग्रामीण परेशान।

सोनभद्र में अक्टूबर से बढ़ती हाथियों की हलचल, छत्तीसगढ़ से आने वाले झुंडों से ग्रामीण परेशान।

HighLights

  1. अक्टूबर से जनवरी तक सोनभद्र में हाथियों की बढ़ती गतिविधियां।

  2. छत्तीसगढ़ से परंपरागत मार्गों से आते हैं हाथियों के झुंड।

  3. मानव-हाथी टकराव से फसलों और संपत्तियों को नुकसान।

जागरण संवाददाता, सोनभद्र। अक्टूबर शुरू होते ही सोनांचल के जंगलों में हाथियों की गतिविधियां बढ़ने लगती हैं। छत्तीसगढ़ से सोनभद्र के रास्ते झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक हाथियों के झुंड अपने परंपरागत मार्गों से गुजरते हैं। यह सिलसिला नया नहीं है। पीढ़ियों से हाथियों के झुंड इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। यही वजह है कि रास्ते में बदलाव या अवरोध उनके लिए सहज नहीं होता।

सोनभद्र के दुद्धी तहसील क्षेत्र में बभनी, म्योरपुर, विढमगंज, बीजपुर और दुद्धी समेत करीब तीन दर्जन से अधिक गांव हाथियों की गतिविधियों से प्रभावित होते हैं। अक्टूबर से जनवरी के बीच इन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता की जरूरत रहती है। जंगल से निकलकर हाथियों के आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचने की घटनाएं इसी अवधि में अधिक देखने को मिलती हैं।

पुरानी लीक पर ही चलता है हाथियों का झुंड

विशेषज्ञों के मुताबिक हाथी अपने परंपरागत आवागमन मार्गों को लंबे समय तक याद रखते हैं। झुंड पीढ़ियों से इस्तेमाल हो रहे रास्तों पर ही आगे बढ़ता है। ऐसे में जंगल क्षेत्र में अतिक्रमण, सड़क, भवन निर्माण या अन्य विकास कार्यों से जब इन रास्तों पर अवरोध खड़ा होता है तो मानव-हाथी टकराव की स्थिति बनती है। रास्ते में आने वाली बाधा को हाथी कई बार हटाने का प्रयास करते हैं। इसी दौरान फसलों, मकानों और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचने के साथ जनहानि की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।