विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सोनभद्र में खदान में हादसे की खबर फैलने से मची अफरा-तरफी, जांच को पहुंचे अधिकारी

By mukesh srivastava Edited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 06 Oct 2026 07:04 PM (IST)

सोनभद्र के बिल्ली खनन क्षेत्र में एक पत्थर खदान में मजदूरों की मौत की अफवाह फैली, जिससे अफरा-तफरी मच गई। ...और पढ़ें

सोनभद्र खदान में कथित हादसे की खबर, मीडिया से झड़प और अधिकारियों की जांच।

सोनभद्र खदान में कथित हादसे की खबर, मीडिया से झड़प और अधिकारियों की जांच।

HighLights

  1. सोनभद्र की खदान में मजदूरों की मौत की अफवाह फैली।

  2. मीडियाकर्मियों को खदान पहुंचने से रोकने पर बाउंसरों से झड़प।

  3. प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हादसे से इनकार किया।

जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र)। बिल्ली खनन क्षेत्र की एक पत्थर खदान में मंगलवार को कथित हादसे में मजदूरों की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी। घटना की सच्चाई जानने खदान पहुंचे मीडियाकर्मियों को रोकने को लेकर खदान में तैनात बाउंसरों और मीडियाकर्मियों के बीच तीखी झड़प हो गई।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मामले को शांत कराने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। हालांकि देर शाम प्रशासनिक अधिकारियों के खदान पर पहुंचने के बाद खदान प्रबंधन ने किसी भी दुर्घटना अथवा मजदूरों की मौत से साफ इन्कार किया।

मंगलवार सुबह बिल्ली खनन क्षेत्र स्थित एक पत्थर खदान में कथित हादसे के दौरान कुछ मजदूरों के मारे जाने की सूचना तेजी से क्षेत्र में फैल गई। सूचना की पुष्टि के लिए स्थानीय मीडियाकर्मी खदान की ओर रवाना हुए। बताया जाता है कि खदान से करीब चार सौ मीटर पहले ही कुछ बाउंसरों और खदान कर्मियों ने मीडियाकर्मियों को रोक दिया।

इतना ही नहीं खदान के आसपास से गुजरने वाले रास्तों पर भी आवाजाही रोकने का प्रयास किया गया। मीडियाकर्मियों ने रास्ता रोकने और घटना की जानकारी जुटाने से रोकने पर आपत्ति जताई तो देखते ही देखते दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। मामला बढ़ने पर वहां तनाव की स्थिति बन गई।

सवाल यह भी उठता रहा कि यदि खदान में कोई हादसा नहीं हुआ था तो मीडियाकर्मियों को मौके तक पहुंचने से रोकने की इतनी कवायद क्यों की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार शाम तहसीलदार नरेंद्र राम, सीओ प्रभात राय और एसएचओ प्रणय प्रसून श्रीवास्तव खदान पर पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर जानकारी ली।

खदान प्रबंधन की ओर से किसी दुर्घटना में मजदूरों की मौत होने की बात से इन्कार किया गया। हालांकि घटना को लेकर दिनभर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। मीडियाकर्मियों को खदान तक पहुंचने से रोकने और रास्तों पर बाउंसरों की तैनाती को लेकर भी कई सवाल उठे। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किस सूचना के बाद खदान क्षेत्र में इतनी गोपनीयता बरती गई और मीडियाकर्मियों को मौके तक जाने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी।