सोनभद्र में न आंधी, न शाम ढली, यह तो धुल का गुबार है और व्यवस्था बीमार है
सोनभद्र में शक्तिनगर-अनपरा फोरलेन हाईवे पर राख और कोयले की धूल तथा बड़े गड्ढों के कारण आवागमन बेहद मुश्किल हो ...और पढ़ें

सोनभद्र: शक्तिनगर-अनपरा फोरलेन पर धूल का गुबार और गड्ढे, बीमार व्यवस्था से लोग परेशान।
HighLights
शक्तिनगर-अनपरा फोरलेन पर राख-कोयले की धूल से प्रदूषण।
सड़क पर बड़े गड्ढे, आवागमन जोखिम भरा, दुर्घटना का खतरा।
धूल से सांस संबंधी बीमारियां, स्वास्थ्य पर बुरा असर।
अंबरीश शर्मा निकू, बीना (सोनभद्र) : इन दिनों न तो आंधी चल रही है और न ही गेहूं की मड़ाई हो रही है। बावजूद इसके शक्तिनगर-अनपरा फोरलेन स्टेट हाईवे पर शाम ढलने से पहले दोपहर में भी अंधेरा छाया रह रहा है। यह समस्या प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि बीमार व्यवस्था का परिणाम है। यही कारण है कि यहां अक्सर ही धुल का गुबार बना रहता है, जिससे क्षेत्रीय लोगों का दम, बेदम होने जैसे हो रहा है। श्वास रोग का खतरा भी बढ़ रहा है। कारण कि सड़क पर उड़ने वाली राख और कोयले की महीन धूल में मौजूद कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके शिकार बच्चे, बुजुर्ग और पहले से सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोग पहले हो सकते हैं। यही नहीं जो स्थिति मानक के विपरीत राख-कोयले की ढुलाई के कारण हुई है। इससे राहगीर बेहाल है। फोरलेन गड्ढों में गुम हो जा रहा है। इससे हादसे का भी खतरा बना हुआ है।
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शक्तिनगर से अनपरा के बीच सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। कई स्थानों पर गड्ढों के भीतर भी गड्ढे होने से आवागमन जोखिम भरा हो गया है। इस मार्ग से राख और कोयले की ढुलाई करने वाले भारी वाहनों की लगातार आवाजाही होती है। वाहनों से गिरने वाली राख और कोयले की धूल से सड़क पर गंदगी के साथ धूल का गुबार भी उठता है। इससे दोपहिया वाहन चालकों को व पैदल गुजरने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क की बदहाली को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। राहगीरों ने सड़क की तत्काल मरम्मत, गड्ढों को भरने और राख-कोयला ढोने वाले वाहनों की निगरानी की मांग की है।
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अनपरा - शक्तिनगर स्टेट हाईवे फोरलेन मार्ग से प्रतिदिन चार हजार से अधिक लोग यात्रा करते हैं। परिक्षेत्र के विभिन्न कोयला परियोजनाओं में स्थानीय व बाहर से आने वाले भारी वाहन की संख्या भी लगभग 500 के आसपास हो जाती है। बिजली परियोजनाओं के राख बांध से राख लोड कर अन्य स्थानों पर जाने वाले वाहनों की संख्या 300 के आसपास हो जाएगी जो इस मार्ग से प्रतिदिन गुजरते है। छोटी बड़ी गाड़ी मिलाकर लगभग 2000 से 2500 की संख्या हो जाएगी अपने गंतव्य को जाने के लिए इस मार्ग से लगभग हजारों लोग यात्रा करते हैं। स्थानीय लोगों की ओर से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस हल नहीं निकल पा रहा है।
भारी वाहन है व ओवरलोड वाहनों के कारण फिर मार्ग खराब हो जाता है और मार्ग पर गड्ढे और धुल की समस्या फिर उत्पन्न होने लगती है। कुछ कोयला परियोजनाएं भी मार्ग पर सफाई करवाती हैं मगर उसके बाद भी धुल खत्म नहीं हो रही है। सबसे ज्यादा स्थिति खराब शक्ति नगर से खड़िया के बीच, ग्राम पंचायत मिसिरा के योगिचौरा से ग्राम कोहरौल तक, बीना बस स्टैंड से अनपरा तक काफी स्थिति खराब है। संबंधित अधिकारी बस कोरम पूर्ति करते हैं। कुछ दिन समस्या ठीक रहती है फिर दोबारा यही समस्या हो जाती है।
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प्रतिक्रिया...
फोरलेन मार्ग पर यात्रा करना काफी कष्टदायक हो गया है इस मार्ग पर सोच समझ कर यात्रा करना पड़ता है । मार्ग पर उड़ रही धूल के कारण काफी परेशानी होती है।भारी वाहन जब मार्ग से गुजरते हैं तो शरीर पर धूल की परत जम जाती है।उड़ रही धूल के कारण आगे का रास्ता नहीं दिखाई देता है।प्रदूषण से सांस से संबंधित तमाम तरह की बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं।
- जयप्रकाश सिंह
शक्तिनगर अनपरा फोरलेन मार्ग पर बाइक से यात्रा करने में काफी डर लगता है अगर मार्ग से एकाएक भारी वाहन गुजरता है तो धूल के कारण चारों ओर अंधेरा छा जाता है जिससे दुर्घटना होने का भय बना रहता है। लोगों ने सोचा था कि फोरलेन मार्ग बनेगा तो हालात सुधरेंगे मगर उसके बाद तो सड़क पर और प्रदूषण हो गया ।
- सुजीत कुमार
क्तिनगर से अनपरा फोरलेन मार्ग की हालत अत्यंत जर्जर हो चुकी है। सड़कों पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे, व मार्ग के किनारे राख का जमाव एवं उड़ती धूल के कारण आम जनमानस को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में कर्मचारी, श्रमिक, स्थानीय नागरिक एवं अन्य लोग आवागमन करते हैं। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।उड़ने वाली धूल लोगों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
- अभिषेक कुमार सिंह
फोरलेन सड़क होने के बाद भी धूल से निजात नहीं मिल रही देखा जाए तो सबसे ज्यादा खराब सड़क यही की होगी जिस पर गड्ढे ही गड्ढे हैं और धूल से लोग परेशान है सड़क पर उड़ रही धूल घरों तक पहुंच रही है जिससे स्थिति दयनीय हो गई है।
- लालचंद गुप्ता
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वर्जन --
सड़क पर उड़ने वाली राख और कोयले की महीन धूल में मौजूद कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे खांसी, सांस लेने में परेशानी, एलर्जी, एलर्जिक राइनाइटिस और अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं। लंबे समय तक धूल के संपर्क में रहने से फेफड़ों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। राहगीर धूल भरे वातावरण में मास्क का इस्तेमाल करें और सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय परामर्श लें।
डा. नागेंद्र, असिस्टेंट प्रोफेसर, छय रोग विभाग, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल लोढ़ी।
