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सोनभद्र में मुस्लिम से निकाह फिर भी आदिवासी प्रमाणपत्र! 14 साल पुराना जाति प्रमाण पत्र निरस्त

By mukesh srivastava Edited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 22 Sep 2026 01:50 PM (IST)

सोनभद्र में जिला स्तरीय समिति ने एक महिला का 14 साल पुराना अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया ...और पढ़ें

सोनभद्र में मुस्लिम से निकाह के बाद आदिवासी प्रमाणपत्र निरस्त, 14 साल पुराने मामले पर बड़ा फैसला।

सोनभद्र में मुस्लिम से निकाह के बाद आदिवासी प्रमाणपत्र निरस्त, 14 साल पुराने मामले पर बड़ा फैसला।

HighLights

  1. सोनभद्र में 14 साल पुराना जाति प्रमाणपत्र निरस्त हुआ।

  2. महिला ने मुस्लिम युवक से विवाह किया था।

  3. जिला स्तरीय समिति ने दस्तावेजों की जांच कर फैसला लिया।

जागरण संवाददाता, सोनभद्र। जिले में अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर जिला स्तरीय समिति ने बड़ा फैसला किया है। दुद्धी तहसील क्षेत्र के घोरपा गांव निवासी रजिया उर्फ दुलरिया पुत्री सरदार के नाम से 14 दिसंबर 2012 को जारी अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाणपत्र समिति ने निरस्त कर दिया।

जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति की बैठक में दस्तावेजों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद यह निर्णय लिया गया। जिले में इस तरह का पहला मामला होने का दावा किया जा रहा है।

मामला करीब चार दशक पुरानी पहचान से जुड़ा है। समिति के समक्ष रखे गए अभिलेखों के अनुसार दुलरिया ने करीब 46 वर्ष पहले वर्ष 1980 में अपना नाम रजिया खातून किया और बघाडू निवासी बहादुर अली से अपनी इच्छा से कोर्ट मैरिज की। इसके बाद उनकी पहचान रजिया खातून के रूप में सामने आई। समिति की जांच में यह भी बिंदु सामने आया कि बघाडू में उनके नाम से खरीदी गई भूमि के दस्तावेजों में रजिया पुत्री सरदार अंकित है।

नाम बदला, लेकिन भूमि दस्तावेजों में पिता की वल्दियत

समिति के समक्ष यह सवाल भी उठा कि मुस्लिम युवक से विवाह के बाद रजिया खातून ने भूमि संबंधी अभिलेखों में पति के बजाय पिता सरदार का नाम क्यों दर्ज कराया। इसी आधार पर समिति ने अभिलेखों में दर्ज पहचान और जाति प्रमाणपत्र की वैधता को जांच के दायरे में लिया। जांच के दौरान पुराने नाम दुलरिया और बाद की पहचान रजिया खातून से संबंधित दस्तावेजों को भी देखा गया।

14 दिसंबर 2012 को जारी हुआ था प्रमाणपत्र

रजिया के नाम से अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र 14 दिसंबर 2012 को जारी हुआ था। अब जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों की समीक्षा के बाद प्रमाणपत्र निरस्त करने का निर्णय लिया है। समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष के रूप में तथा चार अधिकारी सचिव के रूप में शामिल रहे। इस फैसले से पुराने जाति प्रमाणपत्रों की जांच और दस्तावेजों में दर्ज पहचान को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।