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सोनभद्र में जीवन बीमा कार्यालय से जीवन सुरभि प्लान लिया, बीमा की रकम के तीन लाख रुपये के दो चेक का फर्जी भुगतान

By mukesh srivastava Edited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 26 Sep 2026 12:08 PM (IST)

सोनभद्र में जीवन बीमा पॉलिसी के तीन लाख रुपये के दो चेक का फर्जी भुगतान होने का मामला सामने आया ...और पढ़ें

सोनभद्र में जीवन बीमा पॉलिसी के तीन लाख रुपये के चेक धोखाधड़ी से भुनाए गए।

सोनभद्र में जीवन बीमा पॉलिसी के तीन लाख रुपये के चेक धोखाधड़ी से भुनाए गए।

HighLights

  1. जीवन बीमा पॉलिसी के तीन लाख रुपये का फर्जी भुगतान।

  2. कुमार शिवम की जीवन सुरभि पॉलिसी में धोखाधड़ी का आरोप।

  3. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की सोनभद्र में।

जागरण संवाददाता, रेणुकूट (सोनभद्र)। जीवन बीमा पॉलिसी की परिपक्वता पर मिलने वाली तीन लाख रुपये की रकम के दो चेक किसी दूसरे व्यक्ति को दिए जाने और उनके भुगतान का मामला सामने आया है। लखनऊ निवासी कुमार शिवम ने इस मामले में मुर्धवा स्थित जीवन बीमा कार्यालय के तत्कालीन शाखा प्रबंधक, आईडीबीआई बैंक व यूको बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधकों तथा सोनभद्र निवासी एक व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।

कुमार शिवम के मुताबिक उन्होंने 28 अप्रैल 2003 को मुर्धवा स्थित जीवन बीमा कार्यालय से जीवन सुरभि प्लान लिया था। 28 अप्रैल 2018 को पॉलिसी परिपक्व होने के बाद भुगतान की जानकारी लेने पर पता चला कि उनके नाम से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये के दो अकाउंट पेयी चेक जारी किए गए थे। चेक संख्या 232822 का 11 सितंबर 2007 और चेक संख्या 551680 का सात अप्रैल 2012 को नगदीकरण होना बताया गया। शिवम का कहना है कि दोनों चेक उन्हें कभी मिले ही नहीं और न ही उनके किसी बैंक खाते में इनकी रकम पहुंची।

वर्ष 2018 में आरटीआई के जरिए जानकारी मांगने पर जीवन बीमा कार्यालय ने बताया कि दोनों चेक यूको बैंक में उनके खाते में नगदीकृत हुए हैं। जबकि उनके मुताबिक वर्ष 2013 से पहले यूको बैंक में उनके केवल दो बचत खाते थे और उनमें इन चेकों की रकम जमा नहीं हुई। मामले को लेकर वर्ष 2018 में शिकायत किए जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है।

इसके बाद 19 जुलाई 2025 को फिर शिकायत की गई। शिवम के मुताबिक बीमा कार्यालय की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि चेक संख्या 232822 बिना किसी प्राधिकरण पत्र के किसी दूसरे व्यक्ति को दिया गया था और प्राप्तकर्ता के स्थान पर बैजनाथ के हस्ताक्षर थे। दूसरे चेक के प्राप्तकर्ता की जानकारी नहीं मिल सकी।

शिवम के अनुसार 26 सितंबर 2025 को शाखा प्रबंधक ने बैजनाथ को पत्र भेजकर चेक के संबंध में सात दिन में स्पष्टीकरण मांगा था। 27 नवंबर 2025 को उन्हें बताया गया कि बैंक से अभी जानकारी नहीं मिली है। उनका कहना है कि अब तक दोनों चेकों के भुगतान से संबंधित खाते और रकम के वास्तविक प्राप्तकर्ता की जानकारी नहीं दी गई है।

शिकायतकर्ता ने मामले में तत्कालीन संबंधित बैंक व बीमा अधिकारियों तथा बैजनाथ पर आपसी मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर चेकों का भुगतान कराने और तीन लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया है। उन्होंने मुकदमा दर्ज कर जांच कराने के साथ रकम वापस दिलाने की मांग की है। पुलिस ने मुकदमा लिखकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस संबंध में एलआइसी के वर्तमान शाखा प्रबंधक संतोष कुमार पांडे ने कहा कि यह उनके समय का मामला नहीं है इसलिए वह कुछ नहीं कह सकते l