जागरण संवाददाता, रेणुकूट (सोनभद्र) : पिपरी में स्थित रिहंद बांध के दीवार में पड़ चुकी दरारों की भराई के कार्य में लापरवाही व भ्रष्टाचार की जांच तीन सदस्यीय टीम करेगी। इस टीम के 25 जनवरी को पहुंचने की खबर के चलते संबंधितों की नींद उड़ गई है।

बतादें कि बांध में दीवार की मजबूती प्रदान करने के लिए शासन द्वारा 44 करोड़ रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई थी। जिसे सिचाई विभाग द्वारा कराया गया है। कार्य में लापरवाही व भ्रष्टाचार के संबंध में पिपरी निवासी प्रवीण कुमार पांडेय ने जल विद्युत निगम के अध्यक्ष को पत्र भेजकर शिकायत की थी। उक्त कार्यों के विरुद्ध सही कार्य न कराए जाने की शिकायत के आधार पर तत्कालीन अधिशासी अभियंता रामविलास यादव को प्रशासनिक आधार पर तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित करते हुए लखनऊ स्थित कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया था। भ्रष्टाचार की शिकायत के बावजूद अधिशासी अभियंता के स्थानांतरण के बाद सहायक अभियंता अजय कुमार पांडेय द्वारा बैक डेट में लगभग 19 करोड़ 59 लाख के बीजकों को सत्यापित कर फंड निर्गत के लिए लखनऊ प्रेषित कर दिया गया। भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद भी अधिकारियों की मिलीभगत से दो करोड़ 82 लाख रुपये का भुगतान भी जनवरी 2019 में कर दिया गया। उक्त मामले में आरोपी अधिकारी सिविल खंड के सहायक अभियंता अजय कुमार पांडेय पर ओबरा विधायक संजीव गोंड ने भी 16 दिसंबर 2019 को पिपरी थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। बावजूद अधिकारी पर अब तक विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उक्त मामले की जांच शनिवार को तीन सदस्यीय जांच कमेटी करेगी। जांच टीम में जल विद्युत उत्पादन मंडल पिपरी के अधीक्षण अभियंता शैलेंद्र प्रताप, उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम लिमिटेड के हरीराज सिंह व सिविल ट्रांसमिशन एक के लखनऊ स्थित कार्यालय के मुख्य अभियंता बीएस तोमर शामिल हैं।

Posted By: Jagran

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