जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र) : मानसून यानी बारिश के आगमन के साथ ही 1320 मेगावाट क्षमता की ओबरा-सी परियोजना के निर्माण में व्यवधान पड़ना शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत परियोजना के अंदर की सड़कों की वजह से हो रही है। ज्यादातर सड़कों के कीचड़ युक्त होने की वजह से भारी सामानों के परिवहन में दिक्कतें हो रही हैं। ऐसे में ओबरा-सी का तय समय सीमा के अंदर निर्माण करना बड़ी चुनौती हो गई है। वर्तमान में रोजाना सौ से ज्यादा भारी वाहनों का ओबरा-सी में आगमन हो रहा है। इनमें ब्वायलर, टर्बाइन, कुलिग टावर सहित तमाम तकनीकी हिस्सों के लिए सामान आ रहे हैं लेकिन गांधी मैदान स्थित मुख्य गेट से लेकर परियोजना के सभी हिस्सों तक जाने वाले मार्ग फिलहाल कच्चे हैं। गत एक सप्ताह के दौरान मानसून की बरसात के कारण सभी सड़कें कीचड़ से भर गई हैं। जिन पर भारी वाहनों का आवागमन काफी खतरनाक हो गया है। चालकों को तय साइट तक भारी वाहनों को ले जाने में काफी सतर्कता बरतनी पड़ रही है। इसके अलावा विभिन्न निर्माण में बरसात के दौरान दिक्कत आ रही है। बरसात के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर काम में शिथिलता आ जाती है। कई ऊंची जगहों पर बरसात के दौरान काम से परहेज करना पड़ रहा है। गतदिनों एक मजदूर के घायल होने के कारण सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। नौ माह पीछे चल रहा निर्माण

दिसंबर 2016 से शुरू हुए ओबरा-सी के निर्माण को ढाई साल पूरे हो चुके हैं। परियोजना के निर्माण के लिए 52 माह तय किए गए हैं। फिलहाल ओबरा-सी का निर्माण कार्य अभी आठ से नौ महीने पीछे चल रहा है। हालांकि काम में तेजी है लेकिन कई तकनीकी सहित मौसमी समस्याओं ने दिक्कतों को बढ़ाया है। शुरुआती तौर पर समतलीकरण की वजह से कई महीने की देरी के बाद वर्तमान में मानसून की वजह से काम में व्यवधान हो रहा है। गत माह ओबरा आए उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक सैंथिल पांडियन सी ने देरी पर चिता जताते हुए काम में तेजी लाने का निर्देश दिया था। फिलहाल टर्बाइन और बॉयलर, कूलिग टावर के निर्माण के साथ चिमनी, स्वीच यार्ड, कोल हैंडलिग प्लांट, वैगन ट्रिपलर, कंट्रोल रूम आदि हिस्सों के नर्माण में तेजी दिख रही है। ओबरा-सी के रेलवे नेटवर्क विकास के लिए रेलयार्ड में कार्य में भी तेजी दिख रही हैं। परियोजना के रेलयार्ड में ओबरा अ और ब तापघर के लिए स्थापित रेल नेटवर्क में कई परिवर्तन किए जा रहे हैं। परियोजना कालोनी से सेक्टर सात के पास बन रहे कोल यार्ड को देखते हुए पुराने रेल ट्रैक में कई परिवर्तन किए जा रहे हैं। ओबरा सी के लिए आने वाले कोयले और तेल परिवहन के लिए रेलवे नेटवर्क विकसित करने में 42.90 करोड़ की अनुमानित लागत आएगी। पूर्व मध्य रेलवे के चोपन-सिगरौली रेलमार्ग के बगल में इस नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है। मानसून से हो रही दिक्कत

ओबरा-सी का कार्य तेजी से चल रहा है लेकिन वर्तमान में मानसून की वजह से दिक्कतें आ रही हैं। मानसून की वजह से काम की निरंतरता पर प्रभाव पड़ा है। भारी वाहनों के आवागमन में दिक्कत हो रही है। इसके बावजूद अब एक भी दिन की देरी न हो इसके प्रयास किये जा रहे हैं।

-ई. कैलाश गुप्ता,महाप्रबंधक,ओबरा-सी।

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