जागरण संवाददाता, सोनभद्र : घोरावल वन क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ भूमि अतिक्रमणकारियों के हाथ में है। स्थानीय वन क्षेत्र के कुल वन भूमि का 141.675 हेक्टेयर भूभाग अतिक्रमण की चपेट में है। अतिक्रमण कर वन भूमि को बेचने का खेल भी खूब खेला जाता रहा है। वैसे घोरावल वन क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण कर बेचने का खेल कोई नया नहीं है। पहले वन भूमि को मिली भगत से कब्जा किया जाता रहा है इसके बाद खतौनी दिखाकर मूल जमीन से इतर जंगल की जमीन को ही बेचा जाता है।

वन विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो 152.936 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण के रूप में चिह्नित किया गया था। इसमें सन 2018 के अंतिम तक केवल 11.261 हेक्टयर वन भूमि पर से अतिक्रमण हटवा दिया गया। इसके बाद भी अभी 141.675 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमणकारियों के कब्जे बरकरार है। इस प्रकार से बीघा की बात करें तो सैकड़ों बीघा अतिक्रमण की चपेट में है। जिस पर लोगों ने कथित रूप से खेती व निर्माण कार्य कराया है। हालांकि कुछ जगहों पर यह आरोप भी लगता रहता है कि वन विभाग ने जंगल से सटे लोगों की जमीन भी अपनी बता रहा है। बिना प्रमाण के इस प्रकार की बात केवल कही ही जा सकती है। इधर बीच सरकारी आंकड़ों से अलग बात की जाए तो अभी भी आकड़ों से ज्यादा वन भूमि वन माफियाओं के कब्जे में है।

तेंदुहार क्षेत्र का कुछ भाग वृक्षों से आच्छादित

सरकारी आकड़ों में घोरावल वन क्षेत्र का सुरक्षित वन क्षेत्र 23 हजार 552 हेक्टेयर है। इसके अलावा 200 हेक्टयर भूमि प्रोटेक्टेड एरिया अलग से है जिसमें वन भूमि से सटे आसपास के इलाके के लोग इनमें मवेशी चराने के कार्य अथवा सुखी लकड़ी चुनकर जीवकोपार्जन कर सकते हैं। हालांकि घोरावल वन क्षेत्र का अधिकतर इलाका वृक्षों के अभाव में मैदान बन चुका है। केवल तेंदुहार क्षेत्र का कुछ भाग वृक्षों से आच्छादित है। कुछ वर्षों पूर्व लाखों पौधे लगाने का रिकॉर्ड भी इसी वन क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों में पौध रोपण कर बना था। उस समय भी भारी अतिक्रमण को कड़ी मेहनत के बाद खाली कराया गया था। हालांकि अब इन क्षेत्रों के हजारों पौधे सुख चुके हैं। गत वर्ष में 17 हजार पौधों को लगाने का दावा वन विभाग कर रहा है। स्थलीय स्थिति कुछ और ही है। जरूरत है कि वन क्षेत्र की मापी कर पक्की घेरे बंदी की जाए। वर्तमान में सैकड़ों विघा वन भूमि तो मुकदमा में फंस चुका है।

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समय-समय पर अतिक्रमण खाली कराने का अभियान चलाया जाता है लेकिन जंगल से सटे इलाके में बार-बार अतिक्रमण कर लिया जाता रहा है। इस बारे में जल्द ही अभियान शुरू किया जाएगा।

- एसके पटेल, वन क्षेत्राधिकारी

Posted By: Jagran

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