जागरण संवाददाता, सोनभद्र : लोक आस्था का महापर्व छठ के मौके पर ग्राम पंचायतों, समाजिक कार्यकर्ताओं, नगर निकायों आदि ने छठ व्रतियों के लिए विभिन्न घाटों की ओर जाने वाली मुख्य मार्गों सहित ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के रास्तों को सुगम बनाते हुए जहां साफ-सफाई कर पूरी तरह स्वच्छ बनाया। वहीं मार्गों को लाईट आदि से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। लेकिन तीन नवंबर को छठ समाप्ति के छह दिन बाद भी अभी तक कई घाटों व जलाशयों में गंदगी फैली हुई है। बावजूद ग्राम पंचायत व नगर निकाय की तरफ से स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

केंद्र व राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान के बावजूद साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। छठ पर्व पर विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के मुख्य मार्गों से लेकर छठ घाटों की ओर जाने वाले रास्ते को न केवल साफ-सफाई कर लाइट एवं रोशनियों से सजाया था, बल्कि जहां तहां उबड़ खाबड़ हुए गढ्ढ़े को भी मिट्टी आदि से भरकर सुगम व स्वच्छ भी बनाया था। लेकिन डाला छठ संपन्न होने के बाद कई प्रमुख छठ घाट गंदगी से पट गए हैं। छठ पर्व समाप्त होते ही सफाई पर विशेष ध्यान देने वाली ग्राम पंचायत, नगर निकाय व सामाजिक कार्यकर्ताओं के लोग इसे भूल गए। शुक्रवार को राब‌र्ट्सगंज नगर स्थित बढ़ौली पोखरा समेत नगर पालिका क्षेत्र में भी कई घाटों पर गंदगी फैली नजर आई। छठ पर्व में फूल-मालाओं, गिलास, केला के डंठल को जलाशयों में बहा दिया गया। साथ ही घाट पर पड़े हुए अन्य पदार्थों को भी पानी में डाल दिया गया है। इससे स्वच्छता अभियान को पलीता लग रहा है।

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