बिजली की खपत ने तोड़ा रिकार्ड, पांच माह में पिछले साल की आधी से अधिक बिजली की हुई खपत
उत्तर प्रदेश में बिजली की खपत ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में पिछले ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश में बिजली की रिकॉर्ड खपत, उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर सरकार का जोर।
HighLights
उत्तर प्रदेश में बिजली की खपत ने तोड़ा रिकॉर्ड, भारी वृद्धि।
नई तापीय व सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर सरकार का विशेष जोर।
ओबरा-सी इकाइयों के बंद होने से उत्पादन में आ रही बाधा।
जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र): प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग के बीच उत्पादन क्षमता में विस्तार और निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना सरकार व बिजली प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में ही प्रदेश में पिछले पूरे वित्तीय वर्ष की कुल बिजली खपत के आधे से अधिक की खपत हो चुकी है।
10 सितम्बर तक बिजली की कुल खपत 91151 मिलियन यूनिट के पार पहुंच गई है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 162858 मिलियन यूनिट बिजली की खपत दर्ज की गई थी। बिजली की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए प्रदेश सरकार नई उत्पादन परियोजनाओं, नवीकरणीय ऊर्जा और मौजूदा बिजलीघरों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।
औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने, तेजी से हुए विद्युतीकरण, उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या और बिजली आधारित सुविधाओं के विस्तार से खपत में लगातार वृद्धि हो रही है। इस वर्ष जून में पीक आवर के दौरान बिजली की अधिकतम मांग 32673 मेगावाट तक पहुंच गई थी। इसने पिछले वर्ष के अधिकतम मांग के रिकार्ड को तोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया था। ऐसे में आने वाले वर्षों में बढ़ती मांग के अनुरूप उत्पादन क्षमता विकसित करना आवश्यक हो गया है।
नई तापीय परियोजनाओं से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता
प्रदेश में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार नई तापीय उत्पादन परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है। इसमें ओबरा-सी तापीय परियोजना की 1320 मेगावाट क्षमता वाली दो इकाइयों के साथ घाटमपुर तापीय परियोजना जैसी नई उत्पादन इकाइयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ओबरा-सी में 660-660 मेगावाट की दो इकाइयां हैं।
इन परियोजनाओं से उत्पादन शुरु होने पर प्रदेश को बिजली की मांग पूरी करने में काफी मदद मिली। लेकिन पिछले दो माह से ओबरा 'सी' परियोजना की पहली इकाई और लगभग डेढ़ महीने से दूसरी इकाई से उत्पादन ठप होने की वजह से बिजली प्रबंधन को मुश्किल दौर से गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में पुराने बिजलीघरों की तकनीकी क्षमता और उपलब्धता में सुधार पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे इकाइयों के बंद होने से होने वाली उत्पादन हानि कम की जा सके।
सौर ऊर्जा और पंप स्टोरेज पर भी जोर
तापीय बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 तक 22 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके तहत सोलर पार्क, सरकारी भवनों पर रूफटाप सोलर, कृषि फीडरों का सौरकरण और बैटरी स्टोरेज वाली परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सोनभद्र के लिहाज से रिहंद और ओबरा जल विद्युत परियोजनाओं पर पंप स्टोरेज परियोजना (पीएसपी) की स्थापना भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
जिसके शुरुआती दौर में इसके लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी। पंप स्टोरेज प्रणाली में अतिरिक्त बिजली से पानी ऊंचाई पर पहुंचाकर जरूरत के समय उससे बिजली बनाई जा सकती है। इससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने 2025-26 के बजट में जनपद जालौन में कोल इंडिया लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत् उत्पादन निगम के संयुक्त उपक्रम में 500 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट भी प्रस्तावित है।
जिसके लिए उत्पादन निगम को अंशपूंजी हेतु 150 करोड़ देने का प्रावधान किया गया था। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लि. और यूपीआरवीयूएनएल के संयुक्त उपक्रम द्वारा जनपद झांसी के तहसील गरौठा में 200 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र को लगाने की मंजूरी दी है।
जिसकी स्थापना के लिए उत्पादन निगम को अंशपूंजी हेतु 80 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया गया था। इससे साफ़ जाहिर होता है कि प्रदेश में बिजली की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सरकार बिजली उत्पादन बढ़ाने पर लगातार जोर दे रही है।
मेजा परियोजना के विस्तार को दिया था मंजूरी
प्रदेश में दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए मेजा सुपर तापीय परियोजना के विस्तार की योजना भी बनाई गई है। मई 2026 में प्रदेश मंत्रिमंडल ने यहां 800 मेगावाट की तीन नई इकाइयां स्थापित करने को मंजूरी दी। करीब 38157 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को उत्तर प्रदेश सरकार और एनटीपीसी के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित किया जाना है।
इससे भविष्य में प्रदेश की उत्पादन क्षमता में 2400 मेगावाट की वृद्धि प्रस्तावित है। हालांकि नई परियोजनाओं की स्थापना के साथ मौजूदा बिजलीघरों से निर्बाध उत्पादन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। कोयले की उपलब्धता, तकनीकी खराबी और इकाइयों के अनुरक्षण से उत्पादन प्रभावित होने पर बिजली प्रबंधन को अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
बढ़ती खपत के आंकड़े स्पष्ट कर रहे हैं कि प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नई तापीय परियोजनाओं को समय से पूरा करने, सौर ऊर्जा का विस्तार करने और ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था मजबूत करने से ही भविष्य में मांग के अनुरूप बिजली उपलब्ध कराने की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा।
