विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

आदिवासी लोकगीतों को सहेजने में अहम भूमिका न‍िभाने वाले लोकसंस्कृति के साधक डा. अर्जुन दास केसरी का निधन

By mukesh srivastava Edited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 26 Oct 2026 07:09 PM (IST)

साहित्य साधक डा. अर्जुन दास केसरी का हृदयाघात से निधन हो गया, जिससे सोनभद्र के साहित्यिक जगत में शोक की ...और पढ़ें

लोकसंस्कृति के साधक डा. अर्जुन दास केसरी का निधन, आदिवासी लोकगीतों को सहेजने में निभाई अहम भूमिका।

लोकसंस्कृति के साधक डा. अर्जुन दास केसरी का निधन, आदिवासी लोकगीतों को सहेजने में निभाई अहम भूमिका।

HighLights

  1. डा. अर्जुन दास केसरी का हृदयाघात से निधन।

  2. आदिवासी लोकगीतों और परंपराओं के संरक्षण में योगदान।

  3. राष्ट्रपति-राज्यपाल से सम्मानित, दर्जनभर पुस्तकों के प्रणेता।

जागरण संवाददाता, सोनभद्र। साहित्य साधक डा. अर्जुन दास केसरी का सोमवार को हृदयाघात से निधन हो गया। उनके निधन की खबर से जिले के साहित्यिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति और राज्यपाल से सम्मानित डा. केसरी ने अपना जीवन साहित्य साधना और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित किया था।

शिक्षक होने के साथ ही वह वटवृक्ष साहित्य साधक और लोकवार्ता शोध संस्थान के निदेशक भी थे। डा. केसरी ने आदिवासी समाज की बोली, भाषा, लोकगीतों और लोकपरंपराओं के संरक्षण एवं संकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लोरिकायन, डोमकच और नटुआ जैसे लोकगीतों को संकलित कर लोकसंस्कृति की समृद्ध विरासत को सहेजने का कार्य किया। दर्जनभर पुस्तकों के प्रणेता डा. केसरी अपने सरल स्वभाव और मानवीय संवेदनाओं के लिए भी जाने जाते थे, वह 88 वर्ष के थे।

उनके निधन पर शहीद स्थल करारी के निदेशक प्रद्युम्न त्रिपाठी की अध्यक्षता में शोक प्रस्ताव पारित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उन्होंने कहा कि डा. केसरी का निधन साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है। लोकसंस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

इस अवसर पर रामनाथ, शिवेंद्र, अजय चतुर्वेदी, कक्का दिवाकर, मेघ गोपाल कुशवाहा, राधेश्याम पाल, अशोक तिवारी, प्रेमी बौद्ध, दयानंद दयालू, विवेक चतुर्वेदी, दिव्या राय, सुशील मिश्रा, ओमप्रकाश पाठक और अधिवक्ता शिवदास सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।