जागरण संवाददाता, सोनभद्र : दिवाली खुशियों का त्योहार है। और आपकी खुशियों को किसी की नजर न लगे, इसके लिए जरूरी है कि दिवाली को सही तरीके से मनाया जाए। जरा सी लापरवाही खतरनाक हो सकती है। पटाखों की वजह से जलने के मामले के अलावा, अस्थमा, डायबिटिज ब्लड प्रेशर और हार्ट मरीजों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसलिए बेहतर यही है कि इस दीपावली पर पहले से प्ला¨नग कर लें, ताकि घर में किसी को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े और आपकी दिवाली यादगार बन जाए। दीपों के पर्व दीपावली पर पटाखे को लेकर इस बार व्यापारियों में खासा उमंग नहीं दिख रहा है। जिस स्थान पर पटाखा बिक्री की दुकानें सजेंगी वहां हर तरह की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने की तैयारी है। जिला प्रशासन भी पत्र जारी करके क्षेत्र में लाइसेंसी पटाखा व्यापारियों की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही अवैध रूप से पटाखों का कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को निर्देशित किया गया है।

पटाखों की जगह दीपों पर जोर

इस बार लोगों ने पटाखों से दूरी बनाने का पूरा मन बना लिया है। यह देखकर पटाखा व्यवसायी भी बहुत अधिक पैसा इसमें लगाने से कतरा रहे हैं। यह कहना अधिक नहीं होगी कि इस बार पटाखा व्यापारी ग्राहकों की राह देखते रहेंगे। दूसरी ओर नगर के लोगों ने अपने-अपने घर पर दीप जलाने व अपनों के साथ त्योहार मनाने की बात कह रहे हैं। लोगों में बदलाव का ही नतीजा है कि इस बार दीपों के दुकानों पर आमजन की भीड़ बढ़ रही है। प्रतिक्रया..

- अब धीरे-धीरे सभी त्योहार अपने मूल की तरफ लौट रहे हैं। हां बीच में कुछ गलत व्यापक हो गई थी लेकि, अब सब ठीक है। पटाखों पर प्रतिबंध लगना सबके हित के लिए है। और इसमें मेरा सहयोग शत-प्रतिशत रहेगा। -मनीष कुमार, घोरावल। - दीपों के त्योहार में पटाखों की क्या जरूरत। पटाखा फोड़ने से सिर्फ और सिर्फ नुकसान होता है, जबकि दीपों के जलाने से अंधेरा दूर होता है। इस बार की दीपावली दीपों के साथ मनाएं।

- प्रियंका, घोरावल। - इस बार मैं खुद पटाखा नहीं फोड़ूंगा और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करूंगा। प्रदूषण वैसे ही बहुत ज्यादा है। ऊपर से इसमें हम क्यों सहभागी बने। दीपों के त्योहार पर दीपों का प्रयोग करेंगे।

- राजीव देव पांडेय, राबटर्सगंज। - दीपों से ही दीपावली में पूरा घर रोशन होगा ना कि पटाखों की शोर से। इसलिए दीपावली में रोशनी से प्यार करने की जरूरत है न कि धमाकों से। जहां तक हो सके पर्व पर गलत रीतियों से बचें।

- श्रवण कुमार, बभनी। - पटाखा बाजार पूरी तरह से सुस्त है। यह आमजन में बढ़ते जागरूकता की ही देन है। आमतौर अब तक नगर में चहुंओर पटाखों की शोर सुनाई देने लगती थी, लेकिन, इस बार ऐसा नहीं है। यही भावना बनाकर रखने की जरूरत है।

- छोटक प्रसाद यादव, खलियारी। - दीपावली के पटाखों से अस्थमा, डायबिटिज व ब्लड प्रेशर और हार्ट मरीजों को भी काफी समस्या होती है। त्योहार पर इस तरह की समस्याएं क्यों मोल ली जाएं। इस बार की दीपावली पटाखा मुक्त होगी।

- आनंद कुमार, खलियारी।

Posted By: Jagran

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