जागरण संवाददाता, घोरावल (सोनभद्र) : घोरावल तहसील में स्थित उप कोषागार को मुख्यालय से संबद्ध कर देने के कारण स्टांप वेंडरों के साथ-साथ अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी व विरोध बढ़ता जा रहा है। इसको लेकर अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए धरना प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। शनिवार को तहसील अधिवक्ता समिति का एक प्रतिनिधिमंडल बार के अध्यक्ष संतोष कुमार मिश्र के नेतृत्व में जिलाधिकारी एस राजलिगम को विशेष सचिव के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।

घोरावल बार अध्यक्ष ने कहा कि वरिष्ठ कोषाधिकारी द्वारा पूर्ण साजिश के तहत उप कोषागार घोरावल को बड़े स्टांप 10 हजार रुपये से 25 हजार रुपये व अन्य छोटे स्टांप समय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है। जिससे मजबूरन वादकारियों व आम जनता स्टांप को मुख्यालय से लेकर के सब रजिस्ट्रार बैनामा कराया जाता था। वित्तीय सत्र 2018-19 में उप निबंधक कार्यालय घोरावल में पांच करोड़ रुपये तथा वित्तीय सत्र 2019-20 में अप्रैल व सितंबर तक छह महीने में दो करोड़ से भी अधिक रुपये का शुल्क दिया गया है। इसके अतिरिक्त न्यायालय व बैंक आदि में स्टांप टिकट दिया गया है जो शासनादेश के अनुसार उप कोषागार घोरावल को बंद नहीं किया जा सकता। मुख्य कोषाधिकारी द्वारा शासन में गलत रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया है।

स्टांप वेंडरों ने अवगत कराया कि तहसील घोरावल से मुख्यालय की दूरी लगभग 40 से 45 किलोमीटर है। बड़ी रकम लेकर जाने में हम स्टांप वेंडरों की जान व माल का खतरा है। न्याय शुल्क जमा करने में भी परेशानी हो रही है। अधिवक्ताओं की मांग किया कि उप कोषागार घोरावल को जनपद मुख्यालय से संबद्ध न करते हुए पूर्व की भांति स्थानीय तहसील मुख्यालय पर संचालित कराया जाए। प्रतिनिधिमंडल में आदिनाथ मिश्र, हरि प्रकाश वर्मा, राम अनुज धर द्विवेदी, श्रीप्रकाश सिंह, कपिल देव आदि थे।

Posted By: Jagran

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