जासं, ओबरा (सोनभद्र) : तापमान में भारी वृद्धि के साथ औद्योगिक इकाइयों के चालू होने के कारण बिजली की मांग में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। रविवार शाम पीक आवर के दौरान बिजली की मांग का आंकड़ा 21 हजार मेगावाट को पार कर गया। तापमान के 44 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होने का सीधा असर बिजली की मांग पर पड़ा है। रविवार रात 10 बजे 21,535 मेगावाट की अधिकतम आपूर्ति की गई। पिछले 10 माह के दौरान रविवार शाम को सबसे ज्यादा बिजली की मांग दर्ज की गई। मांग पूरा करने के लिए यूपी स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर को भारी मशक्कत करनी पड़ी। तापमान में जिस तरह वृद्धि हो रही है उससे सम्भावना है कि मांग में वृद्धि जारी रहेगी। वृद्धि को देखते हुए उत्पादन निगम सहित निजी इकाइयों से लगातार उत्पादन कराया जा रहा है। यहीं नहीं रिहंद के घटते जलस्तर के बावजूद पिछले तीन चार दिनों से जल विद्युत इकाइयों से भी निरंतर उत्पादन कराया जा रहा है। रिहंद के जलस्तर के 844.3 फीट तक कम होने के बावजूद रिहंद की चार और ओबरा की दो इकाइयों से सोमवार दोपहर को 200 मेगावाट के करीब उत्पादन कराया जा रहा था। हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लॉकडाउन तीन के दौरान पीक आवर में अधिकतम मांग 16 हजार मेगावाट के करीब रह रही थी वहीं सोमवार दिन में मांग 16 हजार मेगावाट से ज्यादा हो गई थी। टूट सकते हैं मांग के रिकार्ड

प्रचंड गर्मी को देखते हुए मांग के पुराने रिकार्ड टूटने की सम्भावना बनते जा रही है। बीते वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में ही मांग और आपूर्ति के आधा दर्जन से ज्यादा बार रिकार्ड टूटे थे। वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में जहां बिजली की अधिकतम प्रतिबंधित मांग 23 जुलाई को रिकार्ड 22,599 मेगावाट तक पहुंच गयी वहीं उपलब्धता भी रिकार्ड 21632 मेगावाट तक बनाने में सफलता पायी गई थी। महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश दूसरा प्रदेश बना जहां बिजली की मांग ने 22 हजार मेगावाट का आंकड़ा छुआ। पिछले वित्त वर्ष में ही लगातार छह बार बिजली के अधिकतम मांग का रिकार्ड बना था। फिलहाल जिस तरह तापमान में वृद्धि हो रही है उससे आने वाले दिनों में मांग का नया रिकॉर्ड बन सकता है।

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