जागरण संवाददाता, खलियारी (सोनभद्र) : नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भारत संचार निगम लिमिटेड की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। कई थानों व चौकियों के सीयूजी मोबाइल नंबर बेकार पड़े हैं। क्षेत्र में कोई घटना या दुर्घटना होने पर पुलिस से संपर्क करने में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन उसके बाद भी विभागीय अधिकारियों की तरफ से इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसको लेकर लोगों में रोष देखा जा रहा है।

नक्सल क्षेत्रों में बीएसएनएल का नेटवर्क ध्वस्त होने से ग्रामीणों के सामने बड़ा संकट तब हो जाता है जब क्षेत्र में स्थापित थानों व चौकी में किसी सूचना का आदान प्रदान करना हो। क्षेत्र के लोगों की माने तो कोई भी कर्मचारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे बीएसएनएल मोबाइल खिलौना बन कर रह गए हैं। आलम यह है कि लोगों को जरूरत के बाद भी आवश्यक सूचना का आदान प्रदान नहीं हो पा रहा है। क्षेत्रीय लोगों की सुरक्षा की सूचना के लिए डायल 100 ही सहारा बना हुआ है। सरईगाढ़ गांव में लगा बीएसएनएल का टावर विभागीय लापरवाही के कारण रामभरोसे पड़ा है। खलियारी बाजार में लगा प्राइवेट कंपनी के टावर का उपयोग कर लोग अपनी सुरक्षा के लिए डायल 100 को ही सहारा मानने लगे हैं। मांची थाना, सुअरसोत चौकी व महुली जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र यूपी बिहार बार्डर पर है। यहां पर भी बीएसएनएल का ही टावर लगा है लेकिन मोबाइल में नेटवर्क रहने की कोई गारंटी नहीं है। रायपुर थाना प्रभारी कमलेश पाल ने बताया कि बीएसएनएल का नेटवर्क हमेशा फेल रहने के कारण थाने का सरकारी मोबाइल बंद रहता है। प्रभारी निरीक्षक मांची अरविद यादव ने बताया कि बिजली रहने पर तो नेटवर्क रहता है लेकिन जैसे ही बिजली कटती है नेटवर्क गोल हो जाता है। सुअरसोत चौकी प्रभारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि बीएसएनएल का नेटवर्क हमेशा खराब सर्विस देता है। महुली चौकी प्रभारी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि हमारे यहां सिर्फ बीएसएनएल का टावर लगा है जो सोलर प्लेट से चलता है। जिसकी सर्विस अच्छी नहीं है। इसकी शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की गई लेकिन सुधार नहीं हुआ।

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Posted By: Jagran

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