सोनभद्र में स्वच्छता की अलख जगाने वाली आशा अब कर रहीं साइन बोर्ड का कारोबार, अब लाखों की हो रही आय
सोनभद्र की आशा गुप्ता, जो कभी स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करती थीं, अब अपनी मेहनत से सफल उद्यमी ...और पढ़ें

सोनभद्र की आशा गुप्ता: स्वच्छता अभियान से उद्यमिता की ओर, साइन बोर्ड से लाखों की कमाई।
HighLights
आशा गुप्ता ने स्वच्छता अभियान से सामाजिक पहचान बनाई।
स्वयं सहायता समूह से जुड़कर साइन बोर्ड व्यवसाय शुरू किया।
लाखों कमाए और दो दर्जन महिलाओं को रोजगार दिया।
संतोष दुबे, बभनी (सोनभद्र)। कभी गांव-गांव घूमकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने वाली असनहर गांव की आशा गुप्ता आज अपनी मेहनत और हुनर से उद्यमी बन चुकी हैं। वर्ष 2015 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत लोगों को खुले में शौच से रोकने के लिए जागरूक करने वाली आशा ने वर्ष 2017 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर रोजगार की राह पकड़ी।
मनरेगा समेत विभिन्न विकास योजनाओं में इस्तेमाल होने वाले सूचना पट्ट (साइन बोर्ड) के निर्माण से शुरू हुआ उनका कारोबार अब बभनी से निकलकर म्योरपुर और दुद्धी विकास खंड तक पहुंच गया है। इस काम से वह अब तक लाखों रुपये की कमाई कर चुकी हैं। साथ ही अन्य महिलाओं और परिवारों को भी रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है।
स्वच्छता अभियान से मिली पहचान, समूह से खुला स्वरोजगार का रास्ता
आशा गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2015 में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत के दौरान उन्होंने अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस कार्य से उन्हें सामाजिक पहचान मिली। वर्ष 2017 में आजीविका मिशन के तहत मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह का गठन कर उन्होंने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। विकास कार्यों में सूचना पट्ट की मांग को अवसर के रूप में पहचानते हुए उन्होंने इनके निर्माण का काम शुरू किया।
तीन ब्लाकों तक पहुंची आपूर्ति, दूसरी महिलाओं को सहारा
शुरुआत में बभनी तक सीमित रहा उनका कारोबार अब म्योरपुर और दुद्धी विकास खंड तक पहुंच चुका है। समूह के माध्यम से तैयार साइन बोर्ड की आपूर्ति तीनों विकास खंडों में की जा रही है। इस व्यवसाय से आशा को आर्थिक मजबूती मिली है और गांव की अन्य महिलाओं व परिवारों के लिए भी रोजगार के अवसर बने हैं। स्वयं सहायता समूह की मिशन प्रबंधक मिथिलेश पांडेय ने आशा की मेहनत और लगन की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाएं समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
दो दर्जन से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार
स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गांव की आदिवासी महिलाओं ने रोजगार की राह पकड़ी है। समूह के माध्यम से दो दर्जन से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला, जिससे उनके जीवन में आर्थिक बदलाव आया। महिलाओं ने स्वच्छ भारत मिशन से जुड़कर संवरा, असनहर, बभनी, चक चपकी व हथियार गांव में जाकर लोगों को जागरूक किया।
