जासं, ओबरा (सोनभद्र) : आत्मा है इक सच्चा हीरा, काया है इक थैली, हीरे को मत झूठा कहना थैली देख के मैली..भरसक ये गाना एक फिल्म का है लेकिन, पंक्ति का एक-एक शब्द एक आदिवासी महिला के रहम दिल और गोद में आए लावारिस नवजात शिशु पर चरितार्थ हो रहा है।

दरअसल, रविवार शाम को ओबरा डैम रेलवे स्टेशन के पास लावारिस हाल में एक नवजात शिशु पड़ा हुआ था। नवजात रो रहा था। इसकी भनक राह चलते किसी के कानों तक पहुंची तो थोड़े समय में काफी भीड़ इकट्ठी हो गई। इसी में एक चेहरा और था जिसका ममत्व जगा और वात्सल्य प्रेम के आगोश में आकर नवजात शिशु को अपनी गोद में उठाकर थपकी देनी शुरू कर दी। सूचना के बाद पहुंची डायल 100 ने शिशु को परियोजना चिकित्सालय लाया, जहां उसका प्राथमिक उपचार किया गया। बहरहाल रेणुकापार के दुर्गम सागरदह की आदिवासी महिला कुन्तु देवी पत्नी राम जमुन गुर्जर ने उसके परवरिश की इच्छा जताई। कुछ विधिक प्रक्रिया के बाद उक्त महिला को नवजात शिशु सौंप दिया गया। कुन्तु देवी ने बताया कि यह संयोग है कि ईश्वर ने उसी के लिए बनाया है।

Posted By: Jagran

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