जागरण संवाददाता, सोनभद्र : राब‌र्ट्सगंज ब्लाक के वेलकप ग्राम पंचायत में गुरुवार की सुबह टूटी बलुई बंधी से आस-पास के दर्जन भर गांवों में पानी भर गया था। करीब चौबीस घंटे बाद शुक्रवार को जब बंधी का पानी कम हुआ तो इन गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली। शनिवार को इस इलाके के प्रभावित गांवों का सर्वे कराया गया। इसमें पता चला कि 11 गांवों के कुल 700 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। सभी परिवारों को तत्कालिक सहायता के रूप में खाद्य सामग्री का वितरण कराया जा रहा है। बर्बाद हुई खेती का आंकलन करने के लिए राजस्व विभाग की टीम लगा दी गई है।

बलुई बंधी टूटने से पानी तेज बहाव के कारण आस-पास के गांवों में घुस गया था। इसके बाद इन गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। स्कूल में शरण लिए लोगों को रात गुजारनी पड़ी। इस आपदा में हुए नुकसान को देखते हुए जिला प्रशासन ने शनिवार की सुबह प्रभावित गांवों का सर्वे कराया। उपजिलाधिकारी सदर शादाब असलम ने बताया कि जिन गांवों में नुकसान हुआ उनका सर्वे कराया गया है। उस हिसाब से पता चला है कि कुल 11 गांवों के सात सौ परिवार प्रभावित हुए हैं। इन्हें तत्कालिक सहायता के रूप में खाद्य सामग्री दी जा रही है। जिन गांवों में फसल नुकसान हुई है उसका आंकलन लेखपालों से कराया जा रहा है। उन्हें भी नियम के अनुसार सहायता राशि दी जाएगी। हर गांव में लगे हैं जिला स्तरीय अधिकारी

प्रभावित परिवारों को खाद्य सामग्री दिलाने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी लगायी गई है। तहसीलदार सदर नंदलाल ¨सह ने बताया कि केवटा, पइका, गंगटी, महुआंव कला, महुआंव खुर्द, अदलगंज, सलखन, कम्हरिया, वेलकप, रजधन, पथरहवा के कुल 700 परिवारों को खाद्य सामग्री देने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी लगायी गई है। इन 11 गांवों में करीब एक दर्जन लोगों के कच्चे मकान भी गिरे हैं। उसका सर्वे कराया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को दिए गए यह सामान

बलुई बंधी टूटने से प्रभावित परिवारों को जो खाद्य सामग्री दी गई उसमें कई सामान हैं। जिसमें दो किलो अरहर की दाल, दस किलो आटा, दस किलो चावल, दो किलो भूना चना, आधा किलो नमक, हल्दी, धनिया, मिर्च 250-250 ग्राम, माचिस का एक पैकेट, बिस्किट दस पैकेट, रिफाइन तेल एक किलो, दस किलो आलू, पांच पैकेट लाई और एक-एक तीरपाल शामिल है।

बोरी लगाकर रोकी गई कटान, तब मिली राहत

गुरमा (सोनभद्र): टूटी बलुई बंधी से तेज बहाव के साथ निकलते पानी को रोकने के लिए जिला प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। गुरुवार को टूटी बंधी को बांधने का प्रयास तो उसी समय से शुरू कर दिया गया था लेकिन बहाव तेज होने के कारण बांधा नहीं जा सका। शुक्रवार की सुबह करीब दस बजे के बाद से जब पानी कम हुआ तो बांधने का काम शुरू किया गया। शनिवार की दोपहर बाद बोरी रखकर पानी को रोका गया।

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