जागरण संवाददाता, सोनभद्र: जनपद में ¨सचाई के प्रमुख साधन बंधियों की बदहाल स्थिति के लिए विभागीय खामी के साथ ही भारत सरकार की आरआरआर (रेनोवेशन, रिस्टोरेशन व रिपेयर) प्रोजेक्ट में शामिल जनपद की 54 बंधियों का एक दशक से अधिक समय से अनुरक्षण नहीं हो पाया है। ऐसे में तटबंध कमजोर होने के कारण इन बंधियों का भी हाल बलुई बंधी जैसी होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

वर्ष 2007 में व्यापक अनुरक्षण के लिए जनपद की 54 बंधियों को आरआरआर योजना में शामिल किया गया। इस योजना के तहत खर्च की 90 फीसद राशि केंद्र सरकार व 10 फीसद राशि प्रदेश सरकार द्वारा व्यय किया जाना निर्धारित किया गया था। दो सरकारों का प्रोजेक्ट होने के कारण योजना की प्रगति का आलम यह रहा कि वर्ष 2016 तक फाइल लखनऊ से दिल्ली का चक्कर लगाती रही। अंतत: उसी वर्ष प्रदेश सरकार द्वारा अपने हिस्से की धनराशि अवमुक्त कर दी गई। इस दौरान स्थिति यह रही कि अन्य किसी भी मद से इन बंधियों के मरम्मत की जहमत नहीं उठाई गई। केंद्र सरकार द्वारा अभी तक अपने हिस्से का धन अवमुक्त नहीं किया जा सका है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश सरकार से प्राप्त धनराशि भी वित्तीय वर्ष के अंत में जारी होने के कारण महज कोरम अदायगी ही की गई है। ऐसे में इन बंधियों का भी हाल बलुई बंधी जैसी होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इन बंधियों पर अन्य मदों से कार्य करने के लिए इनका आरआरआर प्रोजेक्ट से बाहर होना आवश्यक बताया जा रहा है। 34 करोड़ का था प्रोजेक्ट

सोनभद्र: ¨सचाई विभाग द्वारा आरआरआर प्रोजेक्ट में शामिल जनपद की 54 बंधियों के अनुरक्षण के लिए 34 करोड़ रुपये का स्टीमेट तैयार किया गया था। इनमें से अपने हिस्से का प्रदेश सरकार द्वारा तीन करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है। लोगों का मानना है कि यदि समय पर प्रोजेक्ट का काम शुरू हो जाता तो निश्चित ही तटबंधों की स्थिति आज मजबूत होती। सोनभद्र में बंधियों की स्थिति

कुल बंधियों की संख्या- 64

बंधी प्रखंड के बंधियों की संख्या- 40

¨सचाई निर्माण खंड के बंधियों की संख्या- 24

Posted By: Jagran

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