सीतापुर: (विनीत पांडेय)

राष्ट्रपिता मोहनदास करम चंद गांधी इस नाम को कौन नहीं जानता। जब भी बात होती है तो उनके जीवन से जुड़ी अनेक प्रेरक कहानियां लोगों की जुबान पर आ जाती हैं। बापू ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ देशभर में अहिसक आंदोलन किया। देश के कोने-कोने में जाकर न जाने कितनी सभाएं की लोगों को जगाया तब जाकर देश को आजादी मिल सकी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने आंदोलन के दौरान सीतापुर में भी तीन जन सभाएं की थीं। साहित्यकार कवि उदय प्रताप त्रिवेदी त्रिशूल का कहना है महात्मा गांधी ने 17-18 अक्टूबर 1925 में दो दिन सीतापुर प्रवास किया। इन दो दिनों में उन्होंने हिदू महासभा, वैद्य सभा व हिदी सम्मेलन तीन सभाएं की। इन तीनों सभाओं में उन्होंने एक जुटता, स्वावलंबन और देशभक्ति, देश के प्रति अपने कर्तव्य ज्वार फूंका। उनके भाषणों का ही कमाल था कि जिले के तमाम युवा, बच्चे, महिलाएं स्वतंत्रता समर में कूद पड़े।

नपा कर्मियों के कार्यों को था सराहा

बापू का नगर पालिका में जोरदार स्वागत हुआ। उन्होंने नगर पालिका के कर्मचारियों की खूब सराहना की थी। उन्होंने कहा था शहर को स्वच्छ ओर सुंदर बनाने में नगर पालिका के कर्मचारियों का बहुत योगदान रहता है।

वैद्यों के आत्मसंतोषी रुख पर जताया था एतराज

वैद्यसभा में बापू ने कहा था मैंने जो वैद्यों के बारे में कहा उसकी आलोचना हो रही है। मैं अपनी बात वापस नहीं ले रहा हूं और न यह मानता हूं कि एक भी शब्द अनुचित है। मैंने जो टीका-टिप्पणी की, वह आज के वैद्यों को लक्ष्य करके की है, न कि आयुर्वेदिक प्रणाली को लक्ष्य करके। वैद्यों का आत्म-संतोषी रुख मुझे पसंद नहीं है।

हिदू धर्म और सत्य में कोई अंतर नहीं

बापू ने हिदू महासभा में हिदू दर्शन पर अपने विचार रखे थे। उन्होंने कहा था वेदों व हिदू धर्म को मैं अनादि मानता हूं। सत्य अनादि है इसलिए हिदू धर्म व सत्य में कोई अंतर नहीं है। हिदू धर्म के उत्थान के लिए कार्य करें, लेकिन मुसलमान भाइयों के मन में तनिक भी दुर्भावना नहीं होनी चाहिए।

हिदी को राष्ट्र भाषा बनाने पर दिया था जोर

18 अक्टूबर को राजा कालेज के मैदान में हिदी सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा था मुझे इस बात की खुशी है कि हिदी मद्रास में लोकप्रिय बनाने के लिए काम किया जा रहा है, कितु खेद है बंगाल तथा अन्य स्थानों में कोई काम नहीं हो रहा है।

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